The Progress Of Jharkhand #46 | Page 18

दोनों धमों का ितीक था। इस धवज में भी दे वनागरी में वंदेमातरम लिखा था और सबसे ऊपर 8 कमि बने थे। इस धवज को भीकाजी कामा, वीर सावरकर और श्यामजी कृष्ट्ण वमाफ ने प्रमिकर तैयार प्रकया था। िथम प्रवश्व युद्ध के समय इस धवज को बर्लिन कमेटी धवज के नाम से जाना गया क्यों प्रक इसे बर्लिन कमेटी में भारतीय क्ांप्रतकािरयों िारा अपनाया गया था। सन 1913 में चपगिी वेंकैया न एक ऐसे धवज की ककपना की जो सभी भारतवाप्रसयों को एक सूत्र में बाँध दे। उनकी इस पहि को एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ प्रमिा और इन तीनों ने प्रमि कर नेशनि फ़्िैग प्रमशन का गठन प्रकया। वेंकैया ने राष्ट्रीय धवज के लिए राष्ट्रप्रपता महात्मा गांधी से सिाह िी और गांधी जी ने उन्हें इस धवज के बीच म अशोक चक् रखने की सिाह दी जो संपूण भारत को एक सूत्र में बाँधने का संकेत बने। चपगिी वेंकैया िाि और हरे रंग के की पृष्ठभूप्रम पर अशोक चक् बना कर िाए पर गांधी जी को यह धवज ऐसा नहीं िगा प्रक जो संपूणफ भारत का िप्रतप्रनप्रधत्व कर सकता। राष्ट्रीय धवज में रंग को िेकर तरह- तरह के वाद प्रववाद चिते रहे। अल्खि भारतीय संस्कृत कांग्र स ने सन 1924 म धवज में केसिरया रंग और बीच में गदा िािने की सिाह इस तकफ के साथ दी प्रक यह चहदुओं का ितीक है। प्रर्र इसी क्म म प्रकसी ने गेरुआ रंग िािने का प्रवचार इस तकफ के साथ प्रदया प्रक ये चहदू , मुसिमान और प्रसख तीनों धमफ को व्यक्त करता है। काफ़ी तकफ प्रवतकफ के बाद भी जब सब एकमत नहीं हो पाए तो सन 1931 में अल्खि भारतीय कांग्र स के धवज को मूत रूप दे ने के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई। इसी साि कराची कांग्रेस कमेटी की बैठक में चपगिी वेंकैया िारा तैयार धवज, लजसमें केसिरया, श्वेत और हरे रंग के साथ केंा में अशोक चक् ल्स्थत था, को सहमप्रत प्रमि गई। इसी धवज के तिे आज़ादी के परवानों ने कई आंदोिन प्रकए और 1947 में अंग्रेज़ों को भारत छोि ने पर मजबूर कर प्रदया।  ध् वज सहिताा 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध वज संप्रहता में संशोधन प्रकया गया और स् वतंत्रता के कई वषफ बाद भारत के नागिरकों को अपने घरों, कायाफियों और र्ैक् ट री में न केवि राष्ट् ीीय प्रदवसों पर, बल्कक प्रकसी भी प्रदन प्रबना प्रकसी रुकावट के र्हराने की अनुमप्रत प्रमि गई। अब भारतीय नागिरक राष्ट् ीीय ंंिे को शान से कहीं भी और प्रकसी भी समय र्हरा सकते है। बशते प्रक वे ध वज की संप्रहता का कठोरता पूवफक पािन करें और प्रतरंगे की शान में कोई कमी न आने दें । सुप्रवधा की दृप्रष्ट से भारतीय ध वज संप्रहता, 2002 को तीन भागों में बांटा गया है। संप्रहता के पहिे भाग में राष्ट् ीीय ध वज का सामान् य प्रववरण है। संप्रहता के दूसरे भाग में जनता, प्रनजी संगठनों, शैल्क्षक संस् थानों आप्रद के सदस् यों िारा राष्ट् ीीय ध वज के िदशफन के प्रवषय में बताया गया है। संप्रहता का तीसरा भाग केन् ाीय और राज् य सरकारों तथा उनके संगठनों और अलभकरणों िारा राष्ट् ीीय ध वज के िदशफन के प्रवषय में जानकारी दे ता है। 26 जनवरी 2002 प्रवधान पर आधािरत कुछ प्रनयम और प्रवप्रनयमन हैं प्रक ध वज को प्रकस िकार र्हराया जाए: क् या करें: राष्ट् ीीय ध वज को शैल्क्षक संस् थानों (प्रवद्याियों, महाप्रवद्याियों, खेि पिरसरों, स् काउट लशप्रवरों आप्रद) में ध वज को सम् मान दे ने की िेरणा दे ने के लिए र्हराया जा सकता है। प्रवद्याियों में ध वज आरोहण में प्रनष्ट् ठा की एक शपथ शाप्रमि की गई है। प्रकसी सावफजप्रनक, प्रनजी संगठन या एक शैल्क्षक संस् थान के सदस् य िारा राष्ट् ीीय ध वज का अरोहण/िदशफन सभी प्रदनों और अवसरों, आयोजनों पर अन् यथा राष्ट् ीीय ध वज के मान सम् मान और िप्रतष्ट् ठा के अनुरूप अवसरों पर प्रकया जा सकता है। नई संप्रहता की धारा 2 में सभी प्रनजी नागिरकों अपने पिरसरों में ध वज र्हरान का अप्रधकार दे ना स् वीकार प्रकया गया है। क् या न करें: इस ध वज को सांिदाप्रयक िाभ, पदें या वस् त्रों के रूप में उपयोग नहीं प्रकया जा सकता है। जहां तक संभव हो इसे मौसम से िभाप्रवत हुए प्रबना सूयोदय से सूयाफस् त तक र्हराया जाना चाप्रहए। इस ध वज को आशय पूव क भूप्रम , र्शफ या पानी से स् पशफ नहीं कराया जाना चाप्रहए। इसे वाहनों के हुि, ऊपर और बगि या पीछे , रेिों, नावों या वायुयान पर िपेटा नहीं जा सकता। प्रकसी अन् य ध वज या ध वज पट्ट को हमारे ध वज से ऊंचे स् थान पर िगाया नहीं जा सकता है। प्रतरंगे ध वज को वंदनवार, ध वज पट्ट या गुिाब के समान संरचना बनाकर उपयोग नहीं प्रकया जा सकता। भारतीय राष्ट् ीीय ध वज भारत के नागिरकों की आशाएं और आकांक्षाए दशाफता है। यह हमारे राष्ट् ीीय गवफ का ितीक है। प्रपछिे पांच दशकों से अप्रधक समय स सशस् त्र सेना बिों के सदस् यों सप्रहत अनेक नागिरकों ने प्रतरंगे की पूरी शान को बनाए रखने के लिए प्रनरंतर अपने जीवन न् यौछावर प्रकए हैं। 18 । The Progress of Jharkhand (Monthly) 