विश््ललेषण
आदिवासी क्षेत्ररों मेें ईसाई तमेिनरियोों की संलिप्तता को रोकने की आवश्यकता
हरेंद्र प्ताप
कें
द्र सरकार के सामेाजिक न्याय और अधिकारिता मेंत्ािय ने सुप्रीमे कोर््ट मेें दिए गए अपने एक हलफनामेे मेें मेतांतरित ईसाइयों और मेुल्स्िमेों को दिए जाने वाले आरक्षण का विरोध किया है । वषणा 1956 मेें राज्य पुनर््गठन के बाद 1961 से 2011 के बीच हुई जनगणना मेें अनुसूचित जाति एवं जनजाति के राज्यवार उपलब्ि आंकड़े बता रहे हैं हमेारे देश का अनुसूचित और आदिवासी समेाज ईसाई लमेिनररयों के निशाने पर हैं । वषणा 1961 मेें देश मेें जनजाति समेाज के लोगों की कुल संख्या
2,98,79,249 ्थी, जिनमेें से 16,53,570 ईसाई बन गए ्थे, जो कुल जनजाति आबादी का 5.53 प्रतिशत ्था । वषणा 2011 मेें देश मेें जनजाति समेाज के लोगों की कुल संख्या 10,45,45,716 ्थी जिनमेें से 1,03,27,052 यानी 9.87 प्रतिशत ईसाई हैं । कुछ लोग कह सकते हैं कि विगत पांच दिकों मेें ईसाइयों की जनसंख्या बढ़ी नहीं तो फिर यह‘‘ मेतांतरण’’ का शोर क्यों मेचाया जा रहा है? दरअसल ईसाई लमेिनरियां देश के जनजाति समेाज को ध्यान मेें रखकर एक दीघणाकालिक योजना को लरियाल्न्वत करने मेें लगी हुई नजर आती हैं ।
वषणा 1961 मेें देश की कुल ईसाई जनसंख्या
मेें केरल का हिस्सा 33.43 प्रतिशत त्था लमेजोरमे, मेेघालय, नगािैंड, मेलणपुर, अरुणाचल प्रदेश का हिस्सा 7.93 प्रतिशत ्था । अब केरल का हिस्सा घ्टकर 22.07 प्रतिशत रह गया है त्था उपरोक्त पांच राज्यों का हिस्सा बढक़र 23.38 प्रतिशत हो गया है । जनसंख्या की दृष््टटि से पूववोत्र के राज्य भले छो्टे राज्य मेाने जाते हैं, पर सामेारिक, आल्थथिक और सांस्कृलतक दृष््टटि से ये देश के लिए मेहत्वपूणणा हैं । पूववोत्र के लमेजोरमे, नगािैंड और मेेघालय आज ईसाई बहुल राज्य हो गए हैं । अरुणाचल त्था मेलणपुर मेें जिस तेजी से मेतांतरण हो रहा है, उसके आधार पर यह अनुमेान लगाया जाता है कि
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