1. एकांत और दुिणाभ पहुंच वाले क्षेत्ों मेें जीवन
एवं आवास का आलदमे स्वरूप 2. विशिष््ट संस्कृलत 3. बड़े स्तर पर समेुदाय के सा्थ संपक्क
करने मेें संकोच 4. भौगोलिक एकाकीपन और सभी दृष््टटि से
सामेान्य पिछड़ापन
अनुसूचित जनजालतयों की सूची मेें कुछ समेुदायों के प्रवेशन के लिए मेांग पर विचारण करने के लिए और उपरोक्त मेानदंड को ध्यान मेें रखते हुए संविधान आदेश संविधान अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां आदेश( संशोधन) अधिनियमे-1976( 1976 का संख्या 108) के द्ारा व्यापक रूप से संशोधित किए गए ्थे, जबकि कुछ राज्यों के संबंध मेें नये संविधान आदेश भी जारी किए गए ्थे ।
अनुसूचित जनजावतयों की सूची मेें प्िेशन या निष्कासन के व्लए संशोधित प्वरिया
जून 1999 मेें अनुसूचित जनजालतयों की सूची
मेें प्रवेशन या निष्कासन पर दावों पर लनणणाय करने के लिए निम्नलिखित औपचारिकताओं का उ्किेख किया गया है-
1. केवल वे दावे जिन पर संबंधित राज्य सरकारें सहमेत हैं, भारत के मेहापंजीयक और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग मेामेिे पर विचार करते हैं ।
2. जब कभी राज्य / संघ शासित क्षेत् की अनुसूचित जनजालतयों की सूची मेें किसी समेुदाय के प्रवेषण के लिए मेंत्ािय मेें अभ्यावेदन प्राप्त होते हैं तो मेंत्ािय उन अभ्यावेदन को संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतगणात अपेक्षित सिफारिश के लिए संबंधित राज्य सरकार / संघ शासित क्षेत् प्रशासन को भेज देता है ।
3. यदि संबंधित राज्य सरकार प्रस्ताव की सिफारिश करती है तो उसे भारत के मेहापंजीयक को उनकी ल्टप्पलणयों / विचारों के लिए भेज दिया जाता है ।
4. भारत के मेहापंजीयक, यदि राज्य सरकार की सिफाररिों से संतुष््ट हैं, यह सिफारिश हैं कि प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेज दिया
जाए ।
5. उसके बाद, सरकार प्रस्ताव को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पास उनकी सिफारिश के लिए भेज देती है ।
6. यदि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी मेामेिे की सिफारिश करता है तो मेामेिा संबंधित प्रशासनिक मेंत्ाियों के परामर््श के बाद मेंत्रिमंडल के लनणणाय के लिए भेजा जाता है । उसके बाद, मेामेिे को राष्ट्रपतीय आदेश मेें संशोधन के लिए एक विधेयक के रूप मेें संसद के समेक्ष लाया जाता है ।
प्रवेशन, निष्कासन या अन्य संशोधन के लिए दावे जिसको न तो भारत के मेहापंजीयक और न ही संबंधित राज्य सरकारों ने समे्थणान दिया है, को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को नहीं भेजा जाएगा । इसे सामेाजिक न्याय एवं अधिकारिता मेंत्ािय के स्तर पर अस्वीकृत कर दिया जाएगा ।
यदि राज्य सरकार और भारत के मेहापंजीयक के विचारों के बीच असहमेलत है तो भारत के मेहापंजीयक के विचारों को राज्य सरकारों के पास आगे उनकी सिफाररिों को न्यायोचित ठिहराने के लिए भेज दिया जाएगा । राज्य सरकार / संघ शासित प्रशासन से स्पष््टीकरण प्राप्त होने पर, प्रस्ताव को पुन: ल्टप्प्णी के लिए भारत के मेहापंजीयक को भेजा जाता है । ऐसे मेामलोों मेें जहां भारत के मेहापंजीयक लद्तीय संदभणा मेें राज्य सरकार / संघ शासित क्षेत् प्रशासन के विचार के बिंदुओं पर सहमेत नहीं है, वहां भारत सरकार ऐसे प्रस्ताव की अस्वीकृति पर विचार कर सकती है ।
उसी प्रकार उन मेामलोों मेें जहां राज्य सरकार और भारत के मेहापंजीयक प्रवेशन / निष्कासन के पक्ष मेें है. लेकिन उस पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का समे्थणान नहीं है तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाएगा । राष्ट्रीय आयोग द्ारा स्वतः सिफारिश किए गए दावों को भारत के मेहापंजीयक और राज्य सरकारों को भेजा जाएगा । उनके प्रत्युत्र पर लनभणार रहते हुए, उन्हें य्थासंभव लागू औपचारिकताओं के अनुरूप निस्तारित किया जाएगा । �
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