जब कभी राज्य / संघ शासित क्षेत्र की अनुसूचित जनजावतयों की सूची मेें किसी समेुदाय के प्िे्षण के व्लए मेंत्रा्लय मेें अभ्यािेदन प्ाप्त होते हैं तो मेंत्रा्लय उन अभ्यािेदन को संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर््गत अपेक्षित सिफारिश के व्लए संबंधित राज्य सरकार / संघ शासित क्षेत्र प्शासन को भेज देता है ।
विशे्ष
जनजालतयों के लिए सीटोों के आरक्षण का उपबंध करता है ।
4. अनुच्छेद-332 विधान सभाओं मेें अनुसूचित जनजालतयों के लिए सीटोों के आरक्षण का उपबंध करता है ।
5. अनुच्छेद-334 प्रावधान करता है कि लोक सभा और राज्य विधानसभाओं( और लोक सभा और राज्य विधान सभाओं मेें नामेांकन द्ारा एंग्िो इंडियन समेुदायों का प्रतिनिधित्व) मेें अनुसूचित जालतयों और अनुसूचित जनजालतयों के लिए सीटोों का आरक्षण जनवरी 2010 तक जारी रहेगा ।
राज्य विशे्ष प्ािधान
1. अनुच्छेद-371क नागािैंड राज्य के संबंध मेें विशेष प्रावधान करता है ।
2. अनुच्छेद-371ख असमे राज्य के संबंध मेें विशेष प्रावधान करता है ।
3. अनुच्छेद-371ग मेलणपुर राज्य के संबंध मेें विशेष प्रावधान करता है ।
4. अनुच्छेद-371च सिक््ककिम राज्य के संबंध मेें विशेष प्रावधान करता है ।
5. अनुसूचित जनजालतयों को लवलनलदणाष् ्ट करने वाले संवैधानिक आदेिों मेें संशोधन
राज्य पुनर््गठन अधिनियमे-1956( 1956 का अधिनियमे 37) द्ारा 1956 मेें राज्यों के पुनर््गठन के फलस्वरूप उपरोक्त 2 संवैधानिक आदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश( संशोधन) अधिनियमे, 1956( 1956 का अधिनियमे 63) दिनांक 25 सितम्बर 1956 की धारा 4( i) और 4( ii) के तहत संशोधित किए गए ्थे । राज्य पुनर््गठन अधिनियमे की धारा-41 और बिहार एवं पश््चचिम बंगाल( क्षेत्ों का हस्तान्तरण) अधिनियमे, 1956( 1956 का 40) का अनुसरण करते हुए, राष्ट्रपति ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सूचियां( संशोधन) आदेश, 1956 जारी किया । संविधान( अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 को सूची संशोधन आदेश, 1956 की धारा 3( 1) के तहत संशोधित किया गया
जब कभी राज्य / संघ शासित क्षेत्र की अनुसूचित जनजावतयों की सूची मेें किसी समेुदाय के प्िे्षण के व्लए मेंत्रा्लय मेें अभ्यािेदन प्ाप्त होते हैं तो मेंत्रा्लय उन अभ्यािेदन को संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर््गत अपेक्षित सिफारिश के व्लए संबंधित राज्य सरकार / संघ शासित क्षेत्र प्शासन को भेज देता है ।
जबकि संविधान अनुसूचित जनजातियां( भाग ग राज्य) आदेश, 1951 को सूची संशोधन आदेश, 1956 की धारा 3( 2) के तहत संशोधित किया गया ।
अन्य पिछड़ा वगगों के विशिष््टटिकरण के लिए विभिन्न वगगों की मेांग को दृष््टटिगत रखते हुए प्र्थमे पिछड़ा वगणा आयोग( काका कालेलकर की अध्यक्षता मेें) 1953 मेें गलठित किया गया ्था । कालेलकर आयोग ने अपनी रिपोर््ट 1956 मेें प्रस्तुत की । आयोग ने अनुसूचित जनजालतयों को भी अन्य पिछड़े वगगों मेें शालमेि करने की सिफारिश की ्थी । इसके अतिरिक्त संविधान अनुसूचित जनजाति आदेश की संशोधन की
प्रलरिया के मेाध््यम से अनुसूचित जनजालतयों की सूची मेें नये समेुदायों के विशिष््टटिकरण की मेांग की जांच के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति( लोकुर सलमेलत) की सूलचयों के संशोधन पर एक सलाहकार सलमेलत 1965 मेें बनायी गयी ्थी । उसके बाद संसद मेें प्रस्तुत संविधान आदेिों के संशोधन के लिए एक प्रारूप विधेयक अनुसूचित जातियां एवं अनुसूचित जनजातियां आदेश( संशोधन) विधेयक, 1967( चंदा सलमेलत) पर संसद की संयुक्त चयन सलमेलत को भेजा गया ्था । एक अनुसूचित जनजाति के रूप मेें पहचान करने के लिए एक समेुदाय हेतु निम्नलिखित विशेषताएं स्वीकार की गई-
28 flracj 2026