शिक्षा
ज्योवतबा फु्ले का सपना, युवा शक्क्त का संकल्प शिक्षा से सामेाजिक बद्लाव तक
शंकर अंदानी, प्रेसीडें्ट, ईसीसीआई
मे
हात्मेा
सुधारक को याद
ज्योलतराव फुले को याद करना केवल इतिहास के एक मेहान समेाज
करना नहीं है । यह उस विचार को याद करना है, जिसने शिक्षा को मेुल्क्त का मेाध््यम, समेानता को समेाज की बुनियाद और सवाल करने को परिवतणान की पहली सीढ़ी मेाना । आज जब भारत
दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबालदयों मेें शालमेि है और करोड़ों युवा अपने
भविष्य को लेकर नए अवसरों की तलाश मेें हैं, तब फुले के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं । आज की युवा पीढ़ी के सामेने तकनीक है, इं्टरने्ट है, कृत्रिम बुलधिमेत्ा है, नए
व्यवसायों की संभावनाएं हैं, लेकिन सा्थ ही बेरोजगारी, प्रतियोगिता, शिक्षा की गुणवत्ा, परीक्षा व्यवस््था, सामेाजिक असमेानता और अवसरों की असमेान पहुंच जैसी गंभीर चुनौतियां भी हैं । ऐसे
समेय मेें
फुले का जीवन युवाओं को केवल प्रेरणा नहीं देता, बल््कक सवाल पूछने की दिशा भी देता है ।
ज्योलतराव फुले का जन््म 11 अप्रैल 1827 को मेहाराष्ट्र मेें हुआ ्था । उन्होंने ऐसे सामेाजिक वातावरण को देखा जिसमेें जाति और जन््म के आधार पर मेनुष्य की स््थथिति तय करने की कोशिश की जाती ्थी । उन्होंने इस व्यवस््था को स्वीकार करने के बजाय उसके मेूल पर सवाल किया । उनके संघषणा की सबसे मेहत्वपूणणा विशेषता यह ्थी कि उन्होंने केवल विरोध नहीं किया, बल््कक वैकल््कपक रास्ते भी बनाए । उन्होंने विद्यालय खोले, मेलहिाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाया, वंचित वगगों के लिए शिक्षा का रास्ता खोला और सामेाजिक चेतना पैदा करने के लिए संगठिन खड़े किए । आज के युवा के लिए यही सबसे बड़ा संदेश है— व्यवस््था पर सवाल उठिाना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है समेाधान की दिशा मेें कामे करना । फुले ने शिक्षा को सामेाजिक परिवतणान का सबसे प्रभावी मेाध््यम मेाना । 1848 मेें सावित्ीबाई फुले के सा्थ लड़लकयों के लिए विद्यालय शुरू करना उस समेय एक सामेाजिक रिांलत ्थी । उस दौर मेें मेलहिाओं को शिक्षा से दूर रखना सामेान्य बात समेझी जाती ्थी । फुले दंपति ने इस सोच को चुनौती दी और साबित किया कि समेाज की आधी आबादी को शिक्षा से दूर रखकर कोई राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता ।
आज शिक्षा का स्वरूप बदल गया है, लेकिन मेूल प्रश्न अभी भी मेौजूद है । आज देश के बच्चे लवद्याियों, मेहालवद्याियों, विश्वलवद्याियों, ऑनलाइन मेाध्यमेों और प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए भविष्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं । लेकिन क्या हर युवा को समेान अवसर लमेि रहे हैं? क्या गांव का गरीब विद्यार्थी और मेहानगर
20 flracj 2026