स्पेश्ल स्टोरी
नहीं हैं । उनका संदेश व्यापक मेानवीय चेतना से जुड़ा हुआ है ।
समेानता और सम्मेान के विचारों से विकसित भारत की दिशा को वमे्लेर्ी मेजबूती
संत रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित यह अभियान ऐसे समेय मेें सामेने आया है, जब सामेाजिक समेरसता और समेान अवसर का विषय सावणाजनिक जीवन मेें लगातार मेहत्वपूणणा बना हुआ है । विकास का अर््थ केवल आल्थथिक प्रगति या भौतिक सुविधाओं का विस्तार नहीं है । विकास तब सार््थक मेाना जा सकता है, जब समेाज के प्रत्येक वगणा को
सम्मेान, अवसर और भागीदारी प्राप्त हो । इसी व्यापक विचार को संत रविदास जी की शिक्षाओं से जोड़ते हुए मेुख््यमंत्ी ने सामेाजिक समेरसता को मेजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया ।
रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमेंत्ी नरेंद्र मेोदी के नेतृत्व मेें‘ सबका सा्थ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मेंत् के मेाध््यम से समेानता और सामेाजिक समेरसता के मेू्कयों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि लद्किी सरकार भी इन्हीं मेू्कयों के आधार पर विकास कायगों को आगे बढ़ा रही है । उनका कहना ्था कि सामेाजिक समेरसता, समेानता और सम्मेान की मेजबूत भावना ही विकसित भारत के संक्कप को साकार
करने का आधार बन सकती है ।
संत रविदास जी की शिक्षाओं का सबसे मेहत्वपूणणा पक्ष यह है कि वे समेाज को केवल उपदेश नहीं देतीं, बल््कक व्यल्क्त के व्यवहार मेें परिवतणान की अपेक्षा करती हैं । यदि किसी व्यल्क्त के हा्थ मेें विकास की सुविधाएं हों, लेकिन उसे सामेाजिक सम्मेान न लमेिे, तो विकास अधूरा रह जाता है । इसी तरह यदि समेाज आल्थथिक रूप से आगे बढ़े, लेकिन जातीय अ्थवा सामेाजिक भेदभाव की मेानसिकता बनी रहे, तो सामेाजिक प्रगति भी सीलमेत हो जाती है ।
इसलिए पावन मेा्टी कलश वितरण जैसे अभियान की सार््थकता उसके प्रतीकात््मक पक्ष से आगे बढ़कर उसके सामेाजिक प्रभाव मेें निहित है । यदि यह अभियान लद्किी की बल्स्तयों और घरों तक संत रविदास जी के विचारों को पहुंचाने के सा्थ-सा्थ लोगों को सामेाजिक भेदभाव, छुआछूत, ऊंच-नीच और असमेानता के विरुधि सोचने के लिए प्रेरित करता है, तो यह वास्तव मेें एक सार््थक जनअभियान बन सकता है ।
लद्किी जैसे मेहानगर मेें इस संदेश का मेहत्व और बढ़ जाता है । राजधानी मेें देश के लगभग हर हिस्से से आए लोग रहते हैं । अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं, सामेाजिक पृष््ठभूमियोों और आल्थथिक पररल्स््थलतयों के बावजूद लद्किी एक साझा सामेाजिक जीवन का लनमेाणाण करती है । ऐसे शहर मेें समेानता और भाईचारे का संदेश व्यापक सामेाजिक प्रभाव पैदा कर सकता है ।
मेुख््यमंत्ी ने जिस प्रकार पावन मेा्टी को हर जिले, बस्ती और घर तक पहुंचाने की बात कही है, उससे अभियान को जमेीनी स्तर से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है । किसी भी विचार की वास्तलवक ताकत तभी सामेने आती है, जब वह बड़े मेंच से निकलकर आमे नागरिक के जीवन तक पहुंचे । तालक्टोरा स््टेलडयमे से लिया गया समेरसता का संक्कप तभी प्रभावी होगा, जब यह लद्किी की गलियों, बल्स्तयों और परिवारों के बीच व्यवहार मेें दिखाई दे ।
संत रविदास जी की जयंती का यह अवसर समेाज को यह भी याद दिलाता है कि भारत की संत परंपरा ने सलदयों से सामेाजिक एकता और
18 flracj 2026