September 2026_DA | Page 13

अंबेडकर और शिक्षा ज्ान से ही टूटती है असमेानता की दीवार

रितेश वसन्दहा

डॉ.

भीमेराव रामेजी अंबेडकर को केवल संविधान लनमेाणाता के रूप मेें याद करना उनके विरा्ट व्यल्क्तत्व और चिंतन को सीलमेत कर देना है । अंबेडकर मेूलतः ऐसे समेाज के लनमेाणाण के पक्षधर ्थे जिसमेें मेनुष्य की पहचान उसके जन््म से नहीं, उसकी क्षमेता, श्रमे और मेानवीय गररमेा से हो । इस परिवतणान का सबसे िल्क्तिाली मेाध््यम उन्होंने शिक्षा को मेाना । उनके लिए शिक्षा नौकरी पाने की सीढ़ी नहीं, बल््कक सलदयों की सामेाजिक जड़ता, अज्ान, भेदभाव और शोषण के विरुधि संघषणा का सबसे प्रभावी अस्त् ्थी । अंबेडकर का जीवन स्वयं इस विचार का जीवंत उदाहरण है । जिन पररल्स््थलतयों मेें एक बच्चे के लिए सामेान्य शिक्षा
प्राप्त करना भी संघषणा ्था, उन्हीं पररल्स््थलतयों से निकलकर उन्होंने देश और विदेश के
प्रतिष््ठठित संस््थानों मेें उच्च शिक्षा प्राप्त की । उन्होंने
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