October 2026_DA | Page 27

इसी प्रकार यहां इनके अधिकार की बात कही गई हैं । नारी को यह अधिकार है कि यदि उसके सार् मिसबहैव यानी छेड़छाड़ हो तो वह उस व्यब्क्त को दस चप्पि मार सकती है..। वह दंड दे सकती है..। यह अधिकार उसे समाज ने दिया है । समाज भी उसे उचित मानता है । नारी अपने स्िावभमान और इज््ज़त की रक्षा के लिए वह दंड अर्िा ताड़ना दे सकती है ।
इसी प्रकार यहां इनके अधिकार की बात कही गई हैं । नारी को यह अधिकार है कि यदि उसके सार् मिसबहैव यानी छेड़छाड़ हो तो वह उस व्यब्क्त को दस चप्पि मार सकती है..। वह दंड दे सकती है..। यह अधिकार उसे समाज ने दिया है । समाज भी उसे उचित मानता है । नारी अपने स्िावभमान और इज््ज़त की रक्षा के लिए वह दंड अर्िा ताड़ना दे सकती है ।
है । समाज भरी उसे उचित मानता है । नाररी अपने स्िावभमान और इज््ज़त करी रक्ा के लिए वह दं्डो अथवा ताड़ना दे सकतरी है । ्यह वन्यम केवल भारत में नहीं अपितु संसार भर में आज से नहीं बक्ल्क पहले से है ।
इसरी जगह पुरुिों को ्यह अधिकार नहीं है ।
्यवद कोई लड़करी किसरी पुरूष को छेड़ दे तो पुरूष नाररी पर हाथ नहीं उठा सकता । पुरुिों को नाररी पर हाथ उठाने का अधिकार हरी नहीं है । ऐसे केस में उसे न्द्ययायाल्य ्या पुलिस में जाना होगा ।
इसरी प्रकार पशु के लिए है । ्यवद गा्य सींग मार दे, तो आप उसे नहीं परी्ट सकते । ्यवद ऐसा
कोई करता भरी है तो लोग कहते हैं कि वह तो जानवर है, आप क््यों जानवर बन ग्ये..? ्यहां अधिकार उसके स्िभाव से है । शेर के पास जायेेंगे तो वह मार कर खा हरी जा्येगा ।
इसरी प्रकार गंवार ्यानरी पागल ्या मूखवा के लिए ्यह सरीख दरी ग्यरी है । जैसे वह आपके साथ कोई आपत्तिजनक घ्टना करे तो आप उसे प्रताड़ित नहीं कर सकते । लोग ्यहरी कहेंगे कि वह तो पागल है, आप क््यों पागल हो रहे हैं..? ्यहां उसका अधिकार उसकरी मानसिक क्स्थवत से है ।
ढ़ोल का काम है बजना, ्यवद प्रशंसनरी्य कार््य वक्या ग्या तो पक् में, अन्द्यथा विरोध में बजेगा ।
शूद्र का कार््य सेवा का था । उसका अधिकार है अपने मालिक के आदेश का पालन करना । वैसे भरी ्डोॉ. बरीआर अंबे्डोकर ने अपनरी एक पुस्तक शूद्र कौन के प्राक्कथन के पहले पृष्ठ के तरीसरे पैराग्राफ में उल्लेख वक्या है कि ितवामान दलित प्राचरीन ्या वैदिक कालरीन शूद्र नहीं हैं । िहीं पर उन्दहोंने तो ्यहां तक लिखा है कि शूद्रों का ितवामान दवलतों से कोई लेना देना नहीं है । आजकल के अंबे्डोकराइज््डो अंबे्डोकर जरी से बड़े विद्ान तो नहीं हो सकते हैं ।
वैसे भरी देखा जा्ये तो तुलसरीदास जरी के जरीिन में क््या था..? जब पत्नरी ने धिक्कार वद्या कि मुझसे अच्छा होता कि आप प्रभु श्ररीराम में अपनरी आसक्क्त लगाएं । तब तुलसरीदास के जरीिन में उनके आराध््य भगवान श्ररीराम और माता सरीता के आलावा कुछ नहीं था । कोई अपनरी माता के लिए ऐसरी बातें क््यों और कैसे लिख सकता है..?
वेद स््वयंभू हैं किंतु उसके मंत् द्रस््टा ऋषि थे.. केवल ऋगवेद के लगभग तरीन सौ ऋषि थे । उनमें सैंकड़ों महिलाएं ऋषि थीं । लोपामुद्रा, सत््यभामा, मैत्े्यरी, गागशी इत््यावद । शूद्र ऋषि व््यास ने पूरे वेद का संकलन वक्या था, इसरीवलए हरी उन्दहें वेदव््यास कहा जाता है । जब महिलाएं और शूद्र वेद लिख सकते थे तो उन्दहें वेदाधिकार क््यों नहीं..? सब सत्ता में उलझे हुए हैं, और पूरे समाज को भरी उलझाए हुए हैं । आवश््यकता है कि हम समाज को नकारात्मकता से बचाकर सकारात्मक दिशा में ले चलें । �
vDVwcj 2026 27