October 2026_DA | Page 18

प्रकृति से स्िराज तक

आत्मवनभवारता करी अवधारर्ा एक-दूसरे से जुड़तरी है । आत्मवनभवारता का अथवा दुवन्या से अलग हो जाना नहीं है । इसका अथवा है कि व््यक्क्त और समुदा्य अपनरी क्मता, कौशल और संसाधनों के आधार पर आवथवाक अवसर पैदा करने में सक्म हों । आदिवासरी ्युवाओं को पारंपरिक कौशल के साथ आधुनिक उद्यमिता, व्डोवज्टल तकनरीक, कृषि-प्रसंस्करर्, प्यवा्टन, ड्ोन आधारित सेवाओं और ई-वावर्ज््य से जोड़ना इसरी दिशा में एक संभावित रास्ता हो सकता है ।
गांधरी ने श्रम को सम्मान से जोड़ा था । आदिवासरी समाज करी आवथवाक संरचना में भरी श्रम का अत््यंत महत्िपूर््ण स्थान रहा है । कृषि, वनोपज, हस्तवशल्प और सामुदाव्यक गतिविधियोों में श्रम केवल आ्य का साधन नहीं, बक्ल्क
सामाजिक जरीिन का हिस्सा रहा है । आधुनिक अथवाव््यवस्था में चुनौतरी ्यह है कि स्थानरी्य श्रम को केवल सस्ते श्रमबल में बदलने के बजा्य उसे कौशल, पूंजरी और बाजार से जोड़ा जाए । तभरी रोजगार विकास का वास्तविक माध््यम बनेगा ।
आदिवासरी क्ेत्ों में खनिज संपदा का प्रश्न इस पूरे विमशवा को और जव्टल बनाता है । भारत करी औद्योगिक और ऊजावा जरूरतों के लिए खनिज संसाधनों का उप्योग आवश््यक है, लेकिन संसाधन-संपन् क्ेत्ों के स्थानरी्य समुदायोों के लिए विकास का अथवा क््या होगा, ्यह भरी उतना हरी महत्िपूर््ण प्रश्न है । किसरी परर्योजना से
आवथवाक गतिविधि बढ़तरी है तो स्थानरी्य लोगों को रोजगार, कौशल, उद्यम और दीर््घकालिक आजरीविका के अवसर कितने मिलते हैं? प्यावािरर्री्य प्रभािों का आकलन कितना प्रभािरी है? पुनिावास के बाद परिवारों करी सामाजिक और आवथवाक क्स्थवत कैसरी रहतरी है? ्ये प्रश्न केवल प्रशासनिक प्रवरि्या नहीं, बक्ल्क विकास करी गुर्ित्ता से जुड़े प्रश्न हैं ।
गांधरी का ट्रस््टटीशिप वसद्धांत इसरी जगह एक नैतिक कसौ्टरी प्रस्तुत करता है । संसाधन चाहे निजरी हाथों में हों ्या सािवाजनिक संस्थानों के वन्यंत्रण में, उनका उप्योग व््यापक सामाजिक हित से जुड़ा होना चाहिए । आज इसे आधुनिक कॉरपोरे्ट सामाजिक उत्तरदाव्यत्ि, स्थानरी्य भागरीदाररी और लाभ-साझेदाररी के व््यापक संदभवा में समझा जा सकता है । किसरी क्ेत् के संसाधनों
से राष्ट्ररी्य अथवाव््यवस्था को लाभ मिलता है तो स्थानरी्य समाज को भरी शिक्ा, स्िास्थ््य, कौशल, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के रूप में दीर््घकालिक लाभ मिलना चाहिए ।
ग्राम स्िराज करी अवधारर्ा का एक आधुनिक रूप स्थानरी्य स्िशासन में दिखाई देता है । अनुसूचित क्ेत्ों में ग्राम सभा करी भूमिका को संवैधानिक और कानूनरी व््यवस्था ने विशेष महत्ि वद्या है । इसका उद्ेश््य केवल प्रशासन को गांव तक पहुंचाना नहीं, बक्ल्क स्थानरी्य समुदायोों को अपने विकास और संसाधनों से जुड़े निर््णयोों में भागरीदाररी देना भरी है । गांधरी के विचारों करी रोशनरी में देखें तो वास्तविक विकेंद्ररीकरर् वहरी है जिसमें
स्थानरी्य व््यक्क्त केवल ्योजना का लाभाथशी न हो, बक्ल्क ्योजना बनाने और उसके वरि्यान्दि्यन करी प्रवरि्या में भरी उसकरी भूमिका हो ।
शिक्ा के क्ेत् में गांधरी करी नई तालरीम आज भरी विचार करने ्योग््य है । उन्दहोंने शिक्ा को जरीिन, श्रम और सामाजिक उप्योगिता से जोड़ने पर जोर वद्या था । आदिवासरी क्ेत्ों में शिक्ा करी चुनौतरी केवल विद्याल्य खोलने करी नहीं है । बच्ों को उनकरी मातृभाषा और सांस्कृवतक संदभवा से जोड़ते हुए आधुनिक विज्ान, गवर्त, तकनरीक और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराना भरी जरूररी है । स्थानरी्य ज्ान को शिक्ा का हिस्सा बनाने से बच्े अपनरी पहचान से जुड़े रहते हुए आधुनिक दुवन्या करी प्रतिस्पधावा के लिए तै्यार हो सकते हैं ।
स्िास्थ््य के क्ेत् में भरी ्यहरी संतुलन आवश््यक है । दूरस्थ पहाड़री और वन क्ेत्ों में अस्पताल तक पहुंच कई बार स््वयं चुनौतरी बन जातरी है । आधुनिक स्िास्थ््य सेवाओं को स्थानरी्य स्िास्थ््य कार््यकतावाओं, मोबाइल चिकित्सा इकाइयोों और व्डोवज्टल माध््यमों से जोड़ना उप्योगरी हो सकता है । साथ हरी पोिर्, स्िच्छता और स्थानरी्य खाद्य परंपराओं को आधुनिक स्िास्थ््य विज्ान के साथ जोड़कर व््यापक स्िास्थ््य मॉ्डोल विकसित वक्या जा सकता है ।
आदिवासरी महिलाओं करी भूमिका इस पररितवान में विशेष महत्ि रखतरी है । कृषि, लघु वनोपज, हस्तवशल्प और स्थानरी्य बाजार में उनकरी भागरीदाररी अनेक क्ेत्ों में महत्िपूर््ण है । स््वयं सहा्यता समूहों, सहकाररी संस्थाओं, व्डोवज्टल भुगतान और बाजार संपक्क के माध््यम से इस आवथवाक भूमिका को और मजबूत वक्या जा सकता है । महिलाओं करी आवथवाक भागरीदाररी केवल परिवार करी आ्य नहीं बढ़ातरी, बक्ल्क निर्वा्य प्रवरि्या में उनकरी क्स्थवत को भरी मजबूत करतरी है ।
आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने करी दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब आदिवासरी समाज को विकास करी मुख््यधारा में शामिल करने का अथवा उसकरी विशिष््टता को समाप्त करना नहीं होना चाहिए । एक समान विकास मॉ्डोल हर क्ेत्
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