October 2026_DA | 页面 15

आवश््यक हो सकता था । असलरी प्रश्न ्यहरी है कि क््या केवल शीर््ष नेता करी मौजूदगरी से परी्डोरीए करी राजनरीवत जमरीन पर दिखाई देतरी है? इस सवाल का जवाब आसान नहीं है । अखिलेश ्यादव करी मौजूदगरी से सपा ने ्यह संदेश जरूर वद्या कि वह वनिावाचन प्रवरि्या से जुड़े विपक्षी सवालों से अलग नहीं है । प्रदशवान में उनके हिरासत में लिए जाने करी खबर भरी प्रमुखता से सामने आई । लेकिन दूसररी तरफ, जिस सम्य सपा अपने परी्डोरीए विस्तार करी बात कर रहरी है, उसरी सम्य राष्ट्ररी्य स्तर के ऐसे आंदोलन में दलित नेतृत्ि का
व््यापक और दिखाई देने वाला प्रतिनिधित्ि न होना विपक् के लिए राजनरीवतक चुनौतरी बन सकता है ।
राजनरीवत में प्रतरीक बहुत मा्यने रखते हैं । खासकर दलित राजनरीवत में केवल भािर्, नारे और सामाजिक समरीकरर् का नाम लेना प्यावाप्त नहीं होता । नेतृत्ि करी संरचना, संगठन में भागरीदाररी, उम्मरीदवार च्यन, आंदोलन करी प्राथमिकताएं और सड़क पर दिखाई देने वाला प्रतिनिधित्ि— इन सभरी को दलित मतदाता अपने राजनरीवतक अनुभव से जोड़कर देखता है । ्यहरी वह जगह है जहां सपा के परी्डोरीए दावे करी वास्तविक पररीक्ा होतरी है ।
एक तरफ सपा दलित समाज तक पहुंच बढ़ाने करी कोशिश कर रहरी है । अक््टूबर के बाद पक्श्चमरी उत्तर प्रदेश में दलित सम्मेलन करी तै्याररी और नवंबर में आगरा में प्रस्तावित का्यवारिम को इसरी विस्तार करी रर्नरीवत के रूप में देखा जा रहा है । दूसररी तरफ कांग्रेस भरी उत्तर प्रदेश में अपना संगठन पुनगवावठत कर रहरी है । ऐसे में दोनों दलों के बरीच केवल सरी्टों का नहीं, सामाजिक आधार का भरी संघिवा है ।
अखिलेश ्यादव के लिए भरी चुनौतरी इससे बड़री है । 2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव केवल ्यादव-मुक्स्लम समरीकरर् ्या भाजपा विरोधरी वो्ट के गवर्त से नहीं लड़ा जाएगा । सपा ने
स््वयं परी्डोरीए को अपनरी राजनरीवत का आधार बना्या है । इसका अथवा है कि दलित समाज को केवल संख््या के रूप में नहीं, बक्ल्क राजनरीवतक भागरीदार के रूप में प्रस्तुत करना होगा । पार्टी ्यवद दलित सम्मेलन करातरी है, नरीले रंग के प्रतीकोों को राजनरीवतक संदेश के रूप में इस्तेमाल करतरी है और परी्डोरीए को अपनरी रर्नरीवत का केंद्र बतातरी है, तो राष्ट्ररी्य स्तर के आंदोलनों में भरी उसरी सामाजिक प्रतिनिधित्ि करी निरंतरता दिखाई देनरी चाहिए । सपा के दलित आउ्टररीच को लेकर हावल्या राजनरीवतक गतिविवध्यां बतातरी हैं कि पार्टी इस िगवा तक पहुंच बढ़ाने को चुनािरी रर्नरीवत का महत्िपूर््ण हिस्सा मान रहरी है ।
यहीीं से दिल्लरी के प्रदशवान करी सबसे बड़री राजनरीवतक पररीक्ा सामने आतरी है । दलित मतदाता को क््या केवल चुनािरी आंकड़े के रूप में ्याद वक्या जाएगा ्या आंदोलन और नेतृत्ि में भरी बराबर जगह मिलेगरी? परी्डोरीए क््या केवल भािर् का संवक्प्त राजनरीवतक सूत् रहेगा ्या उसके भरीतर वास्तविक सत्ता- साझेदाररी दिखाई देगरी? और क््या अखिलेश ्यादव कांग्रेस के साथ राष्ट्ररी्य मंच साझा करते हुए ्यूपरी में कांग्रेस से अपनरी राजनरीवतक दूररी भरी बनाए रख पाएंगे? इन सवालों का जवाब आने वाले महीनोों में अधिक स्पष््ट होगा ।
vDVwcj 2026 15