कवर स््टटोरी
राजनरीवतक जमरीन बचाना, भाजपा के खिलाफ व््यापक सामाजिक गठजोड़ बनाना और दवलतों को परी्डोरीए में वास्तविक भागरीदार बनाना आसान नहीं होगा ।
2027 के मुहाने पर उत्तर प्रदेश करी राजनरीवत में सरीईसरी का मुद्ा एक बड़ा राष्ट्ररी्य विवाद जरूर है, लेकिन चुनािरी पररर्ाम केवल इस मुद्े से त्य नहीं होंगे । अंततः संगठन, सामाजिक प्रतिनिधित्ि, नेतृत्ि पर भरोसा और वोटोों का वास्तविक हस्तांतरर् हरी निर््णणायक होगा ।
एक दिन का प्रदशवान सुवखवा्यां बना सकता है, लेकिन सामाजिक प्रतिनिधित्ि हरी चुनािरी जमरीन तै्यार करता है । ्यहरी इं्डोरी गठबंधन और खासकर अखिलेश ्यादव के सामने सबसे बड़री पररीक्ा है ।
बहरहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि ज्ानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन ने विपक् को एक मंच वद्या है, लेकिन उस मंच पर सामाजिक प्रतिनिधित्ि का सवाल भरी उतनरी हरी गंभरीरता से खड़ा हुआ है । अखिलेश ्यादव का प्रदशवान में शामिल होना राजनरीवतक रूप से महत्िपूर््ण है, लेकिन उसे अकेले परी्डोरीए करी मजबूतरी का प्रमार् मानना जल्दबाजरी होगरी ।
उत्तर प्रदेश करी राजनरीवत में अब प्रतीकोों से ज््यादा संगठन, प्रतिनिधित्ि और जमरीन पर मौजूदगरी करी पररीक्ा होगरी । 403 विधानसभा सरी्टों का चुनाव सामने है । अखिलेश ्यादव ने खुद कहा है कि उनकरी नजर अब 403 पर है ।
ऐसे में दिल्लरी के प्रदशवान करी तस्िरीर से ज््यादा महत्िपूर््ण वह तस्िरीर होगरी जो आने वाले महीनोों में उत्तर प्रदेश के गांव, कस्बे और विधानसभा क्ेत्ों में दिखाई देगरी ।
क््योंकि चुनािरी राजनरीवत में एक दिन करी मौजूदगरी सुवखवा्यां बना सकतरी है, लेकिन सामाजिक प्रतिनिधित्ि हरी लंबे सम्य का राजनरीवतक आधार त्य करता है । परी्डोरीए करी राजनरीवत के लिए ्यहरी सबसे कठिन पररीक्ा है । �
दिल्िी में मौजूदगी, अखिलेश की मजबूरी
ज्ञा
नेश कुमार प्रकरर् में ्यह सवाल बड़ा है कि समाजवादरी पार्टी प्रमुख अखिलेश ्यादव करी मौजूदगरी मजूबतरी स्तर पर क््यों नहीं है । उत्तर प्रदेश करी राजनरीवत में समाजवादरी पार्टी पिछले कुछ सम्य से परी्डोरीए— पिछड़ा, दलित और अल्पसंख््यक— सामाजिक समरीकरर् को अपनरी राजनरीवतक रर्नरीवत का प्रमुख आधार बना रहरी है । 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश करी 80 सरी्टों में 37 सरी्टें जरीतरी थीं और इसरी प्रदशवान के बाद परी्डोरीए को उसकरी राजनरीवत का महत्िपूर््ण आधार माना ग्या । अब 2027 विधानसभा चुनाव सामने हैं और पार्टी इस सामाजिक समरीकरर् को और विस्तार देने करी कोशिश कर रहरी है । यहीीं से अखिलेश ्यादव करी दिल्लरी में मौजूदगरी का राजनरीवतक अथवा तलाशना स्िाभाविक है । इसे केवल एक सामान्द्य विपक्षी प्रदशवान में उनकरी भागरीदाररी कहकर छोड़ देना ्यूपरी करी मौजूदा राजनरीवत को अधूरा पढ़ना होगा । खुद अखिलेश ्यादव ने 6 अक््टूबर को प्रदशवान के दौरान कहा कि अब उनकरी नजर राज््यसभा करी तरीन सरी्टों पर नहीं बक्ल्क उत्तर प्रदेश विधानसभा करी 403 सरी्टों पर है । ्यह ब्यान उस सम्य आ्या जब सपा ने राज््यसभा के लिए दो उम्मरीदवारों— प्रोफेसर रामगोपाल ्यादव और धनराज परिमल नथवानरी— को मैदान में उतारा था और तरीसरे
उम्मरीदवार को लेकर अ्टकलें चल रहरी थीं ।
अखिलेश का दिल्लरी जाना केवल दिल्लरी करी सड़क पर विपक्षी एकजु्टता का सवाल नहीं है । ्यह ्यूपरी के मतदाता को वद्या जाने वाला राजनरीवतक संकेत भरी है । सपा नेतृत्ि के सामने एक साथ कई मोचरे हैं— भाजपा से सरीधरी राजनरीवतक लड़ाई, कांग्रेस के साथ रिश्तों का प्रबंधन, परी्डोरीए सामाजिक समरीकरर् को मजबूत करना और दलित मतदाताओं के बरीच अपनरी स्िरीकार््यता बढ़ाना । ऐसे में सरीईसरी के खिलाफ आंदोलन से दूररी बनाना भरी राजनरीवतक रूप से कठिन होता और उसमें शामिल होना भरी
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