पंडाल� के गेट भी इनक� भ�यता का खास िह�सा होते है । �ाय: िकसी ऐितहािसक या �िस� इमारत का �ित�प गेट के �प म� बनाया जाता है । इसिलए कह� लाल िकला नजर आता है तो कह� संसद भवन । कह� �हाइट हाउस म� भ� �वेश कर रहे होते ह� तो कही एिफल टावर म� । बड़े शहर� म� पंडाल� क� भ�यता देखने के िलए भी भ�� क� भीड़ उमड़ पड़ती है । सारा वातावरण पूण� �प से जगमगा रहा होता है । पव� का आरं भ दुगा�पूजा का पावन पव� शरद ऋतु म� आने वाले आि�न माह के कृ �ण प� क� अमाव�या से ही आरं भ होता है । उस िदन सुबह महालया क� परं परा है । महालया अथा�त मां दुगा� क� आगमन भेरी । बां�ला व सं�कृ त भाषा म� देवी क� आगमनी के गीत गाए जाते ह� । आकाशवाणी तथा दूरदश�न पर दुगा� क� आराधना, दुगा� स�शती का गान और दुगा�पूजा से जुड़ी कथाओं को संगीतमय लय म� �सा�रत िकया जाता है । दुगा� �तुित क� यह मधु�रम अनुगू ंज बंगभूिम के हर �यि� के अंतम�न म� एक �पंदन सा जगा देती है । इसके साथ उनम� पूजा का उ�साह आरं भ हो जाता है । महालया के िदन निदय� म� �नान के उपरांत घट �थापना का िवधान है । िम�ी के कलश पर िसंदूर से मंगल िच� बनाकर उस पर हरा ना�रयल रखा जाता है । पास ही के ले के वृ� क� बड़ी सी डाल रखी जाती है । पूजा �थल को कला�मक ढंग से सजाया जाता है । बंगाल को �ाचीन समय से ही दुगा� का मायका माना जाता है । मा�यता है िक दुगा� के मायके आने के िदन ही पूजा समारोह के िदन ह� । हर वष� दुगा� कै लाश पव�त पर ि�थत िशवधाम से अपनी संतान� सिहत अपने मायके आती ह� । अमीर हो या गरीब सभी इस अवसर पर खुिशयां मनाते ह�, नये व� खरीदते ह�, िम� व संबंिधय� को उपहार देते ह� । �ितमाओं क� �थापना ष�ी के िदन पुरोिहत पहले घट यानी घड़े को पंडाल म� रखते ह� । के ले के वृ� को लाल िकनारे वाली साड़ी पहनाई जाती है । तब पंडाल� म� दुगा� क� �ितमाएं �थािपत कर दी जाती है । िव�तृत पंडाल म� सामने देवी क� �ितमा �थािपत होती है । िसंहवािहनी दस भुजाधारी दुगा� भाले से मिहषासुर का मद�न कर रही होती ह� । इस �ितमा के एक ओर उनके पु� गणेश एवं काित�के य क� मूित�यां और दूसरी ओर प�ह�ता ल�मी तथा वीणाधारी सर�वती िवराजमान होती ह� । ये मूित�यां इतनी सजीव होती ह� िक मूित�कार� क� रचनाशीलता क� �शंसा िकए िबना नह� रहा जाता । अंजिल एवं आरती रोज पूजा म� अंजिल एवं आरती का �म चलता है । अ�मी का िदन दुगा�पूजा का सबसे शुभ िदन माना जाता है । लोग बड़े चाव से पूजा म� भाग लेते ह� । अ�मी को लगभग पूरी रात ही पंडाल� म� भीड़ रहती है �य�िक अ�मी एवं नवमी के संिधकाल के समय म�यराि� म� स�धी पूजा अथा�त संधी पूजा एक मह�वपूण� पूजा होती है । देवी के सामने 108 दीपक ��जविलत िकए जाते ह� । कह�-कह� आरती के समय ढाक क� ताल के साथ ि�त्रयां धूनी नृ�य करती ह� । ढाक एक पारं प�रक वा� है जो ढोल के समान होता है । रं गीन कपड़े और झालर� से सजे ढाक बजाने वाले ढाक� भी िवशेष तौर पर बुलाए जाते ह� । पंडाल के अंदर का वातावरण पूरी रात भि�पूण� उ�लास से प�रपूण� नजर आता है तो बाहर बनी दुकान� पर भी भीड़ लगी रहती है । इसके अलावा लोग एक पंडाल से दूसरे पंडाल को देखने बढ़ते रहते ह� । नवमी को भी पूजा का जोर बराबर बना रहता है । अंत म� वह िदन भी आ जाता है िजस िदन दुगा� को पारं प�रक ढंग से िवदा िकया जाता है । िवजय दशमी के िदन मूित� के सम� दीप जलाकर ि�त्रयां देवी को स�देश यानी संदेश का भोग लगाती ह� । उनके म�तक पर िसंदूर लगाती है िफर शुभकामना �व�प उसी िसंदूरदानी से अ�य सुहािगन� को िसंदूर लगाया जाता है । इसके उपरांत शंख �विन तथा जयघोष के बीच दुगा� को अ�ुपूण� िवदाई दी जाती है । आलीशान �ितमाओं को �क आिद पर रख कर शोभा या�ा के �प म� नदी के तट पर ले जाया जाता है जहां बड़ी ��ा से इ�ह� जल म� िवसज�न के बाद दो प�ी आकाश म� छोड़ने क� परं परा भी है । मा�यता यह है िक ये प�ी कै लाश पव�त जाकर िशव को दुगा� के आगमन क� सूचना देते ह� । लोग नदी से शांित जल पंडाल और घर म� लेकर आते ह� और सब
Special Volume 1, October 2015 21