पर िछड़कते ह� । िवसज�न के बाद लोग एक-दूसरे को शुभ िबजोय क� शुभकामनाएं देते ह� । कोलकाता क� दुगा�पूजा कोलकाता महानगर म� दुगा�पूजा का जोश तो जैसे जुनून क� सीमाएं पार कर जाता है । इस महानगर म� आज एक हजार से अिधक �थान� पर दुगा�पूजा का आयोजन होता है । अिधकतर पूजा पंडाल इतने भ�य होते ह� िक लोग ध�का-मु�क� करते ह�ए एक पंडाल से दूसरे पंडाल म� पहं◌ुच जाते ह� । दरअसल यह महानगर पंडाल� क� साज-स�जा म� सबसे आगे है । महाअ�मी और नवमी को कोलकातावािसय� का उ�माद देखते ही बनता है । चौराह�, नु�कड़�, गिलय� म� लोग� के ह�जूम नजर आते ह� । सारा शहर नयी नवेली-दु�हन क� तरह सजा जगमगा रहा होता है । अनेक बड़ी कं पिनयां पूजा पंडाल� क� साज-स�जा एवं सुंदरतम मूित�य� के िलए अवाड� क� घोषणा भी करती ह� । िवजयदशमी पर िवसज�न के िलए मूित�य� को जुलूस के �प म� ले जाने का ��य भी यहां एकदम अलग होता है । एक-एक जुलूस के साथ 25-25 ब�ड साथ चलते ह� । उनके आगे रं गिबरं गे गेट बने होते ह� जो जुलूस क� शोभा को बढ़ाते ह� । वा�तव म� कोलकातावासी दुगा�पूजा के िबना जीवन क� क�पना भी नह� कर सकते । कहते ह� यहां के लोग पूजा के माह म� इतनी खरीदारी करते है िजतनी वष� भर म� नह� करते । दुगा�पूजा का यह रं ग देखने यहां पय�टक भी आते ह� । कोलकाता का जीवंत �प देखना हो तो एक बार पूजा के अवसर पर वहां अव�य जाना चािहए । बंगाल के बाहर दुगा�पूजा बंगाल के बाहर पहली बार वाराणसी म� दुगा�पूजा का आयोजन ह�आ माना जाता है । इसके अित�र� आज गोरखपुर, इलाहाबाद, पटना, भुवने�र, कटक आिद शहर� म� इसी रीित और परं परा से दुगा�पूजा मनाई जाती है । िद�ली म� दुगा�पूजा क� शु�आत सन् 1911 म� कोलकाता से राजधानी िद�ली �थानांत�रत होने पर ह�ई �य�िक तब अनेक कोलकाता िनवासी भी िद�ली म� आ बसे थे । उनके साथ ही उनक� सं�कृ ित का अिभ�न अंग दुगा�पूजा भी यहां आयी । यहां रह रहे लगभग चार लाख बंगालीजन पूजा के चार िदन� म� बाक� दुिनया को भूलकर जैसे जीवन क� तमाम खुिशयां समेटने म� लग जाते ह� । िद�ली व उसके आस-पास के �े�� म� कु ल िमलाकर दो सौ से अिधक छोटी-बड़ी पूजा आयोिजत होती है । इनम� काली बाड़ी, िचतरं जन पाक�, सरोजनी नगर, लोदी रोड, इं���थ सोसायटी कॉ��ले�स, अशोक िवहार, िम�टो रोड, के पूजा-पंडाल� क� छटा देखते ही बनती है । िचतरं जन पाक� म� तो कई भ�य पूजाओं का आयोजन होता है िजनम� कोलकाता क� ही भांित भ�यता का दश�न होता है । यहां लगभग सभी पूजा-पंडाल� म� सां�कृ ितक काय��म भी होते ह� िजसके िलए खास तौर से पि�म बंगाल से जा�ा नाटक मंडिलयां बुलाई जाती ह� । दुगा�पूजा क� धूम आज िवदेश� म� भी रहती है । खास तौर पर उन देश� म� जहां भारतीय बंगाली समाज के लोग जा बसे ह� । उनके साथ ही अ�य भारतीय भी िमल दुगा�पूजा मानते ह� । इसके िलए तीन-चार माह पूव� ही कोलकाता के कु मारतुली से दुगा� मां क� �ितमाएं मंगवा ली जाती ह� । हालांिक वहां उतनी भ�यता से पूजा नह� होती परं तु िफर भी अपनी सं�कृ ित के �ित लगाव को इस पूजा �ारा �दिश�त िकया जाता है । इं�ल�ड, अमे�रका के अित�र� यूरोप के कई देश� म� बसे भारतीय बंगाली लघु �प म� ही सही दुगा�पूजा अव�य मनाते ह� । इन अवसर� पर वो बड़े गव� से उस देश के लोग� को भी शािमल करते ह� । इस तरह भारत देश क� रं गिबरं गी सं�कृ ित क� झलक उनके सामने रखी जाती है । दुगा�पूजा का समारोह कह� भी मनाया जा रहा हो, पूजा के पल लोग� के िलए अिव�मरणीय बन जाते ह� । इसके साथ ही दुगा�पूजा हम� एकता का �तीका�मक संदेश देती है ।
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Special Volume 1, October 2015 22