Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 73
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लेककन टदशा शोभराज के घर िें ककधर थी ये उसे नही पता था और जब पता पड़ा कक टदशा ऊपर छत
पर है तो किला ववना कुछ सिझे जाने छत पर पहुींच गयी. छत पर एक ही किरा था. किला ने किर
का दरवाजा खिखिाया. किरा ख ल
ा तो एक लडकी ने किला को शहर की भाषा िें पूींछा, “हााँ बताइए.”
किला हडूवड़ा गयी. बोली, “वो टदशा है यहााँ पर? िुझे उससे मिलना था.” लडकी ने सपाि लहजे िें उत्तर
टदया, “वो अभी तैयार हो रही है थोड़ी दे र बाद मिल लेना.” किला इसके बाद श्जद न कर सकी. किर
के अींदर से ककसी ने पूींछा, “कौन है लडकी दरवाजे पर?”
दरवाजे पर खड़ी लडकी ने किला को प ीं ू छना चाहा लेककन किला िुड़कर आगे बढ़ च क
ी थी. लडकी ने बबना
पूींछे ही बोल टदया, “शायद कोई काि वाली होगी?” किला की साड़ी और चेहरा दे ख उस लडकी को किला
काि वाली ही लगी होगी. किला को ज्यादा बुरा नही लगा. सोचती थी कक उस लडकी से ज्यादा उसकी
ककस्त्ित का दोष है .
किला को टदशा का इतींजार दे खते दे खते काफी दे र हो चुकी थी लेककन टदशा ऊपर से नीचे न आ सकी.
रात के सिय ककसी ने शोभराज के घर िें आ बताया कक बारात आ चुकी है . बारात क्या थी मसफच चींद
लोग थे .
लडके के घरवाले थे और दो तीन लोग और थे . कुलमिलाकर छह सात लोग के करीब हो सकते थे . शोभराज
ने घर के आींगन िें ही शादी की पूरी व्यवस्त्था करवा दी थी. वो बारातघर के ककराये को बचना चाहता था.
पींडडत ने आींगन िें ही फेरों का प्रबींध कर डाला. टदशा को ऊपर से नीचे आींगन िें लाया गया. किला की
नजर अपनी लाडली पर पड़ी तो उसका टदल तडप उिा. लगा जैसे ककसी ने पत्थर के नीचे डाल कुचल
टदया है . टदशा का िासूि चेहरा आींसुओीं से लदा हुआ था. आाँखें अब भी स ज
ी हुईं थीीं .
टदशा ने किला की तरफ दे खा और ग स्त्
से से नजरें फेर लीीं . शायद वो किला से नाराज़ थी. अपनी बबटिया
की नाराज़गी का कारण किला अच्छी तरह से जानती थी लेककन िजबूर ववधवा िााँ की िजबूरी टदशा नही
जानती थी.
पींडडत ने शोभराज को आवाज दे कहा, “अरे शोभराज जी बर बधू को लाकर िींडप िें बबिाइए.” शोभराज
ने तुरींत एक आदिी भेज लडके वालों को िींडप िें आने के मलए कहलवा टदया. िींडप का नाि िींडप था
लेककन बीच आींगन िें जिीन पर हवनक ीं ु ड बनाकर शादी के साथ फेरे होने वाले थे . थोड़ी ही दे र िें लडके
वाले आ गये . टदशा को भी िींडप िें लाकर बबिा टदया गया. बगल िें एक काला सा पच्चीस साल के करीब
का लड़का भी बैिा टदया गया.
किला का टदल उस लडके को दे खते ही कुम्हला गया. आाँखों िें बेिी की सूरत बसी थी. जो गोरी धचट्टी
और खुबसूरत थी. द स
री सूरत उस लडके की जो टदशा को ब्याहने आया था. जो टदशा की शक्ल के िुकाबल