Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 71

71
टदन िें दोपहर से पहले जीतू घर आ पहुींचा. किला की सााँस िें सााँस लौि आई लेककन जीतू बहुत ननराश हो लौिा था. किला ने जीतू का लिका हुआ चेहरा देख बड़ी उत्सुकता से पूींछा,“ क्या बात है बेिा तू इतना उदास क्यों है? कोई बात हो गयी क्या?”
जीतू हताशा भरे स्त्वर िें बोला,“ िााँ हिारे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है. टदशा बहन की सगाई श्जस लडके से हो रही है वो टदशा बहन के टहसाब से बहुत काला और बदसूरत सा है. िााँ टदशा बहन बहुत रो रही थी. शायद उसका िन उस लडके से शादी करने के मलए नही करता था.
िााँ तुि यकीन नही करोगी लेककन खुद िेरा भी िन उस लडके को देख खखन्न हो गया था. िााँ अपनी टदशा बहन श्जतनी सुींदर है वो लड़का उतना ही बदसूरत. िुझे उस सिय ताऊ पर बहुत गुस्त्सा आया. अगर िेरा बस चलता तो िें ये शादी न होने देता.”
किला श्जस बात को पहले से सोच डर रही थी वो आखखर हो ही गयी. टदशा जब आई थी तब उसने भी यही कह अपना डर जताया था लेककन किला के टदल ने ये बात न िानी. आखखर शोभराज ने उस िासूि लडकी से ककस जन्ि की दुकिनी ननकाली थी.
किला िन ही िन रोने लगी लेककन जीतू को सिझाते हुए बोली,“ कोई बात नही बेिा. इस धरती पर काले और गोरे दो ही रींग होते हैं. आदिी सुन्दरता से नही उसके गुण से जाना जाता है. लड़का िीक नही तो क्या हुआ उसका घरवार सपन्न तो है न. अच्छा टदशा से तेरी कोई बात हुई थी क्या? तुझसे कु छ बोला उसने?”
जीतू ने गदचन‘ ना’ िें टहलाते हुए जबाब टदया,“ नही िााँ. िेरी टहम्ित नही हुई कक उससे कु छ बात कर पाता. उसे रोते हुए जरुर िैंने देखा था और िााँ ताऊ की कॉलोनी िें तो सबको ये पता है कक अपनी टदशा बहन उनकी नौकरानी है. लोग ताऊ की बहुत तारीफ़ कर रहे थे. कहते थे देखो शोभराज का टदल ककतना बड़ा है जो नौकरानी की शादी अपने खचे पर कर दी.
िााँ िुझे ये बात सुनकर भी बहुत गुस्त्सा आया था. ताऊ ने सब लोगों को बताया है कक अपनी टदशा बहन उनकी नौकरानी है. िााँ ताऊ ककतने धगरे हुए ननकले. तुि तो उन्हें देवता और भगवान बतातीीं थीीं लेककन वो तो दुष्ि से भी बदतर ननकले.”
किला जीतू की इस बात का क्या जबाब देती? वो तो खुस इस सवाल का जबाब खोजने की कोमशश कर रही थी. किला सबसे बड़ी गलती अपनी िान रही थी. न वो अपनी बेिी को वहाीं भेजती और न ये सब होता. चाहे वो ककसी गरीब घर िें टदशा की शादी करती लेककन खुद तो देखभार कर शादी कर सकती थी.
किला के िन िें शोभराज के प्रनत जो भी ववकवास था आज वो सब खत्ि हो गया था. गुस्त्सा भी बहुत आ रहा था लेककन किला कु छ कर भी तो नही सकती थी. शायद शोभराज ने उसके वेसहारा होने का फायदा