Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 69

69 किला बोल पड़ी, “क्या बताऊ बहन तुिको. अब टदशा की शादी है . शादी तो दद्दा ही कर रहे हैं लेककन िुझे भी तो कुछ दे ना पड़ेगा. द स रा दद्दा कह गये हैं कक साफ सुथरे और अच्छे कपड़े पहन कर आना लेककन घर िें एक पैसा भी ऐसा नही श्जससे बच्चों को कपड़े पहना सक ाँ ू या लडकी की शादी िें ही कुछ दे सक ाँ ू . बस इसी धचींता िें बैिी हुई थी. न तो िैं ही चैन िें हूाँ और न ही बच्चे चैन िें हैं लेककन तुि ककस काि के मलए आयीीं थी वो बताओ.” आगरे वाली सोचते हुए बोली, “किला िें पूींछने आई थी कक तुम्हारे बाहर वाले द्वार पर अपना अनाज सुखा लें . अगर तुि कहो तो आज ही अनाज डाल दें . ” किला ने थोडा सोचा और बोली, “हाीं डाल दो बहन लेककन थोडा रास्त्ता छोड़ दे ना.” आगरे वाली किला के हााँ कहने से खुश हो गयी. उसे किला पर दया आ गयी. बोली, “किला तुि कहो तो िैं तुम्हारी कुछ िदद कर सकती हूाँ?” किला का िन उल्लामसत हो उिा. बोली, “बहन तुि क्या िदद करोगी िेरी?” आगरे वाली जल्दी से बोली, “जैसे तुि कहो तो जीतू के मलए नये कपड़ों का इींतजाि कर द ाँ . ू िेरे छोिे लडके की लम्बाई जीतू के बराबर ही है . अगर तुि कहो तो जीतू के मलए उसके नये कपड़े लाकर दे जाऊ. साथ ही िें कुछ रुपयों का भी प्रबींध करवा सकती हूाँ श्जन्हें त ि आराि से लौिा दे ना. छोिे बच्चों को नये कपड़े पैसों से टदलवा दे ना.” किला का िन सचिुच िें बहुत हल्का हो गया. उसे इस बात का अींदेशा भी नही था कक ये िुश्ककल इतनी आसानी से हल हो जाएगी. किला ने थोडा सींकोधचत हो कहा, “बहन ऐसा हो पायेगा क्या?” आगरे वाली ववकवास के साथ बोली, “क्यों नही. िैं अभी जाकर अपने लडकों से बात करतीीं हूाँ . ” इतना कह आगरे वाली वहाीं से उिकर अपने घर चली गयी. किला का िन आगरे वाली की बात से खुश भी था और डरा हुआ भी. खुश इसमलए था कक उसकी सिस्त्या हल हुई जा रही थी और डर इसमलए लग रहा था कक कुछ साल पहले किला आगरे वाली का एक कपड़े रखने का बैग ले अपने िायके चली गयी थी. जब लौि कर गााँव आई तो बैग की चैन खराब ननकली. इस बात पर आगरे वाली ने उसे घींिा भर जली किी सुनायीीं थीीं . उससे भी पहले एक बार आगरे वाली स अचार डालने का डब्बा मलया था. उस डब्बे का ढक्कन श्स्त्लप हो गया. इस बात पर भी आगरे वाली ने किला को खूब सुनाया था और आज कफर से किला उसकी िदद लेने जा रही थी. किला बैिी सोच ही रही थी कक आगरे वाली अपने दोनों लडकों के साथ उसके घर आ पहुींची. थोड़ी ही दे र िें सब काि बन गय. आगरे वाली का छोिा लड़का उम्र िें जीतू से दोगुना था. साथ ही िोिा भी खूब था लेककन उसकी लम्बाई जीतू के बराबर ही थी. जीतू ने उसके दो जोड़ी कपड़ों िें से एक जोड़ी पसींद कर मलए. आगरे वाली का लड़का खाया वपया था और जीतू भुखिरी का मशकार रह चुका था. श्जसके शरीर पर िाींस नाि की चीज बहुत कि थी लेककन नय