Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 67

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सब लोग गाड़ी िें बैि गये. टदशा भी गाडी िें बैिी कभी अपनी िााँ को देखती तो कभी अपने भाइयों को और कभी अपने जजचर होते घर को. सब के सब उसे वेगाने और नीरस लगते थे. सोचती थी कक अगर ये सब अपने होते तो वो इनसे दूर क्यों रह रही होती?
तभी गाडी धीरे धीरे आगे को बढ़ चली. किला की आाँखों से झरना वह उिा. वेवश ववधवा किला अपनी सगी बेिी को अपने घर िें रख तक न सकती थी और न ही उसका अपने हाथों से वववाह ही कर सकती थी.
थोड़ी ही देर िें गाडी आाँखों से ओझल हो गयी. किला बुझे िन और थके कदिों से बच्चों के साथ अपने घर िें आ गयी. हर सिय इधर से इधर भाग कर काि करते रहने वाली किला को इस वक्त लगता था कक अब वो कभी कोई काि न कर पायेगी. आज भगवान से उसकी सारी उम्िीदें खत्ि सी हो गयीीं थीीं.
उसे लगता था भगवान उसकी सुनता ही नही है. दुुःख पर दुुःख देने वाले भगवान ने आज एक और दुुःख किला को दे टदया था. वो अपनी बेिी को श्जतना सुखी सिझती थी वो सब आज गलत ननकला था. किला वेशक टदशा के सािने न कह सकी लेककन उसे आशींका थी कक पता नही शोभराज कै से घर िें शादी करा रहा है. पल पल िन को सम्हालती किला भगवान से सब िीक कर देने की गुहार ककये जा रही थी.
***
गुजरते टदनों की एक आहि और हुई. करीबन एक हफ्ते बाद शोभराज शहर से दानपुर गााँव आया. पहले आटदराज के घर गया और कफर किला के घर आया. किला तो उसके आने का इन्तजार कर रही थी. उसे जानना था कक उसकी बेिी की शादी का क्या हुआ?
शोभराज ने आते ही किला के हाथ िें शादी का एक काडच थिा टदया और बोला,“ किला ये तुम्हारी लडकी की शादी का काडच है. इस िहीने की दस तारीख को उसकी शादी है और आि तारीख को सगाई. तुि चाहो तो एकाध टदन पहले ही आ जाना. बच्चों को भी साथ ले आना लेककन तुि सब लोग कपड़े िीक िाक से पहन कर आना. बच्चो को भी अच्छी तरह नहला धुला कर लाना. क्या है कक वहाीं बाहर के लोग आयेंगे न तो थोडा देखना पड़ता है.”
किला ने उदास हो हाीं िें सर टहला टदया. कै सा टदन था आज किला के मलए. खुद के बेिी की शादी का काडच उसे मिल रहा था. जबकक िीक इसका उल्िा होना था कक वो खुद शोभराज को ये काडच देने जाती. बेिी की शादी अपने हाथों से करने के सारे अरिान अब खत्ि हो चुके थे.
अब तो उसे बेिी की शादी के सिय जाकर ही उससे मिलना था. शोभराज ने किला का ध्यान भींग ककया,“ अच्छा किला िैं चलता हूाँ. शहर पहुींचने के मलए देर हो जाएगी.” किला ने घूाँघि िें से ही अपना सर हााँ िें टहला टदया.