Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Página 66

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बातें नछड़ गयीीं थीीं.”
शोभराज जल्दी करते हुए बोला,“ अच्छा किला अब हि लोग चलते हैं. चलो टदशा हिें देर हो रही है.” किला का टदल धुकधुका उिा. बोली,“ दद्दा टदशा को दो चार टदन यहीीं रहने दीश्जये. अभी तो घींिा भर भी नही हुआ इसको आये हुए.”
शोभराज जल्दी से बोल पड़ा,“ अरे नही किला. ये इस वक्त नहीीं रुक सकती. शादी की तैयारी भी तो करनीीं हैं इसकी. अब शादी हो जाने दो उसके बाद जी भर के इसको रोका करना. अरे भई तुम्हारी लडकी है तो शादी के बाद तुम्हारे ही घर पर आएगी. िैं तो बस शादी होने तक इसको अपने पास रख रहा हूाँ.”
शोभराज की इस बात के बाद न तो टदशा ही कु छ बोल पायी और न किला ही कु छ बोल सकी. टदशा को देख किला को लग रहा था कक वो शोभराज से बहुत डरती है. उसे अपनी बच्ची को आज अपने से दूर करते हुए बहुत दुुःख हो रहा था लेककन न जाने ऐसा क्या था कक वो शोभराज की बात को िाल न सकी.
शायद अपनी बेिी के भववष्य को लेकर धचींनतत होना एक कारण हो सकता था. एक गरीब ववधवा िााँ के मलए अपनी बेिी के बारे िें कोई भी ननणचय लेना बहुत िुश्ककल हो रहा था. जबकक वो ननणचय उसकी श्जन्दगी से जुडा हुआ था.
किला ने हााँ िें सर टहला टदया. किला का िन टदशा से अभी और बातें करना चाहता था लेककन सिय इस बात की हरधगज भी इजाजत न देता था. टदशा भी िााँ की तरफ बड़ी भूखी नजरों से देख रही थी िानो अभी िााँ से बहुत कु छ कहना चाहती हो लेककन अपने घर की धगरती हालत देख कु छ भी न कह पा रही थी.
भाइयों के पुराने फिे हुए कपड़े देख उसका जी जलता था. िााँ को श्जस हालत िें छोड़ कर सालों पहले गयी थी आज भी िााँ उसकी हालत िें रह रही थी. आज भी सवा सौ ग्राि दूध आ रहा था. टदशा सोचती थी कक िााँ के पास जायेगी तो कु छ अपने मलए िाींग लेगी लेककन यहााँ तो खुद भुखिरी फै ली हुई थी. िााँ और भाइयों को देख लगता था जैसे इन लोगों को मसफच एक सिय खाना मिलता है.
टदशा शोभराज के पीछे पीछे बाहर की तरफ चल दी. किला और उसके तीनों लडके भी अपने घर की लाडली को देखने के मलए उन सब के पीछे चल टदए. टदशा तो भावुक थी ही लेककन किला हद से ज्यादा भावुक हो रही थी.
टदशा अभी कु छ बातों को िााँ से पूछना चाहती थी क्योंकक शोभराज ने किला की कई बुराइयााँ टदशा से जाकर कहीीं थी लेककन आज टदशा ने जब घर की हालत देखी तो एकबारगी उसे शोभराज की बातें पूणचतया मि्या लगीीं.