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िान रही है और िें...? काश किला भी शोभराज की हकीकत जान पाती. शोभराज चलने के मलए उि खड़ा हुआ और बोला,“ अच्छा किला िैं चलता हूाँ. जल्दी ही टदशा को यहााँ घुिाने लेकर आऊीं गा.”
किला ने भीगी आाँखों से हााँ िें सर टहला टदया. शोभराज किला के घर से बाहर ननकल गया. किला उस पापी देवता को देखती रह गयी. िन िें शोभराज के मलए बहुत ज्यादा सम्िान था. जैसे आज उसने किला को अिृत लाकर दे टदया हो.
किला ख़ुशी के िारे पागल हुई जाती थी. टदशा की शादी वाली बात सारे िोहल्ले की औरतों से कह डाली. िोहल्ले की औरतें भी ताज्जुब करतीीं थी. उन्हें सिझ न आता था कक शोभराज जैसा ननकम्िा आदिी इतना अच्छा काि कै से कर सकता है? किला तो शोभराज के पुराने कृ त्यों को भूल ही गयी थी. न उसे जिीन हडपने की बात ध्यान रही और न पैसों के ऐर फे र की बातें ही ध्यान रहीीं. बस टदशा की शादी अच्छे घर िें हो रही है यही काफी था.
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िहीना भर गुजर चुका था. किला को शोभराज की बात बार बार ध्यान आ रही थी. उसे अपनी बेिी टदशा के आने का इींतजार था और तभी एक टदन किला के िू िे फू िे घर के सािने एक कार आकर रुकी. कार शोभराज के लडके की थी. शोभराज के साथ उसके लडके की बहू और टदशा भी आई थी.
किला के घर के साथ साथ पूरे गााँव िें इस बात की हलचल हो गयी. सालों बाद टदशा के आने की खबर गााँव िें आग की तरह फै ल गयी. गााँव िें ककसी के घर कोई आता है तो हर आदिी उस आये हुए शख्स को देखने के मलए बैचेन होता है.
किला के िुींह से तो बात ही न बनती थी. टदशा अब बहुत सुींदर लगने लगी थी. पहले से बहुत गोरी भी हो गयी थी. कपड़े भी बहुत अच्छे पहने हुई थी. टदशा गााँव की सबसे सुींदर लडकी लग रही थी. ऐसा गााँव के लोग और किला कहती थी.
टदशा ने घर िें आ अपनी िााँ को पहचान कर ' निस्त्ते ' ककया. िााँ भावववभोर थी. वो तो टदशा को अपने गले से लगाना चाहती थी लेककन टदशा िें ऐसा कोई भाव नही था. टदशा के तीनों भाइयों ने उसके पैर छु ए लेककन टदशा ने उन्हें भी अपने गले से न लगाया.
परन्तु किला या उसके लडकों को इस बात का जरा भी बुरा न लगा. उन्हें तो इस बात की ही बहुत ख़ुशी थी कक टदशा कफर से घर आ गयी थी. किला के घर िें मसफच दो ही चारपाई थीीं. वो भी आधी िू िी हुई. एक पड़ोसी ने जीतू को अपने घर ले जाकर अपनी एक चारपाई दे दी श्जससे आये हुए िेहिान आराि से बैि सकें.
छोिू भागकर परचून की दुकान पर गया और चीनी चाय के साथ बबश्स्त्कि और निकीन ले आया. आज