Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 62

62 कैसे हो सकती है . इसमलए थोड़े सिय रुक जाओ.” किला शोभराज की बात से थोडा सींतुष्ि तो हुई लेककन उसे इस बात का अत्याधधक आकचयच हुआ कक शोभराज ने टदशा के मलए लड़का भी दे ख मलया और बताया भी नही. आखखर टदशा उसकी लडकी थी. तो अधधकार भी उसका होना चाटहए. अपनी बेिी के मलए कौन लड़का सही है और कौन गलत है इस बात के ननणचय पर िााँ का भी तो हक बनता है न. किला शोभराज से बोली, “दद्दा आपने टदशा के मलए लड़का भी दे ख मलया और िुझे बताया तक नही? कि से कि िैं भी तो एक बार उस लडके का घर बार दे ख लेती. िैंने तो उस लडके की स र ू त तक नही दे खी जो िेरी लडकी से शादी करने जा रहा है . ” शोभराज बात को हल्का करने के मलए बोला, “अरे किला तुि हिेशा भोली की भोली ही रहोगी. िैं जब टदशा को लेकर गया था तब िैने तुिसे क्या कहा था? िैने कहा था कक उसकी शादी की श्जम्िेदारी भी िेरी ही होगी और आज वो श्जम्िेदारी िैने ननभा भी दी. रही बात लड़का दे खने की तो तुि खुद सोचो क्या िैं टदशा के मलए कोई गलत लड़का दे खकर आऊींगा? क्या िैं उसका कोई नही लगता. तुिने िुझ पर भरोसा कर अपनी लडकी िुझे दे दी तो क्या अब भरोसा नही रहा. तुि खुद सोचो कक टदशा इतने बड़े घर िें जा रही है और वहाीं तुि लड़का दे खने जाती तो तुम्हारी गरीबी की हालत दे ख लडके वाले शादी को राज़ी होते क्या? अब तुम्हारी लडकी उस घर िें पहुींच जाए तब श्जतना चाहे वहाीं जाना. तुि तो मसफच इस बात की ख़ श ी िनाओ कक तुम्हारी लडकी इतने बड़े घर िें जा रही है कक तुि सोच भी नही सकतीीं . ” भोली भाली किला शोभराज की बातों से भावुक हो गयी. वो ये बात भूल गयी कक लड़का दे खना है या उसका घरवार दे खना है . उसे बस इतना याद रहा कक उसकी लडकी बहुत अिीर और अच्छे घर िें जा रही है . जो सपने दे ख दे ख कर उसका िन बुझता रहता था आज वही सच हो गया था. वो शोभराज के चरणों को छूना चाहती थी. िन िें शोभराज आज नसीब का दे वता बन गया था. श्जस काि को वो श्जन्दगी भर सोच कर ही रह जाती उसे शोभराज ने चुिककयों िें कर डाला था. उसे शोभराज से इतने बड़े काि की उम्िीद नही थी. श्जस शोभराज को वह धोखेबाज सिझ बैिी वो तो दे वता पुरुष ननकला. किला आाँखों िें आींसू भर लायी. िन भावुक हो गया. भराचए हुए गले से बोली, “दद्दा आपका एहसान ि श्जन्दगी भर न भूलूींगी. िैं आपके चरणों को धो धो कर श्जन्दगी भर पीती रहूाँ तो भी कि होगा. िेरे तीनों लडके आपका श्जन्दगी भर सम्िान करें गे . दद्दा आज आप िेरा गला काि दे ते तो िैं वो भी िाफ़ कर दे ती.” इतना कहते कहते किला लगभग रो ही पड़ी. शोभराज थोडा बैचेन हो गया. सोचता था ये औरत िुझे दे वता