Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 58

58 हो? ककताबों िें तो मलखा है कक सब बराबर होते हैं . िास्त्िर जी भी यही कहते हैं लेककन अकेले िें वो िुझको उस लडके से द र ू रहने के मलए कहते हैं . भगवान जी वो लड़का भी बहुत गरीब है . हो सके तो उसके मलए भी कुछ कर दे ना. भगवान जी िें ये धचट्ठी आपको इस मलए मलख रहा हूाँ क्योंकक आप इस द न ु नयाीं के िामलक हो. आपने िुझे गरीबी िें पैदा ककया है . आपने िेरे वपता की जान ली है . अगर आप ये सब न करते तो िुझे कोई द ुः ु ख न होता. अच्छा है आप धरती पर नही रहते नही तो अदालत वाले जज साहब आपको जेल िें डलवा दे ते . िेरे गााँव का एक आदिी आज भी जेल िें बींद है क्योंकक उसने एक आदिी को िार टदया था लेककन अगर आप धरती पर रहते तो ऐसा करते ही नही क्योंकक आपको पता होता कक जो लोग धरती पर रहते हैं उनकी ककतनी परे शाननयााँ होती हैं? अब आप खुद ही सोचो कक सातवें आसिान से आपको ककतना टदखाई दे ता होगा. हो सकता है आप िेरा घर न दे ख पाते हों. जब आप ये धचट्ठी पढो तो िेरा घर जरुर दे खना. गााँव के बीचोंबीच सबसे बुरी हालत का घर िेरा ही है . इस घर िें न तो एक भी भैंस है और न ही पक्की छत. साथ ही घर िें िूिी फूिी साईककल तक नही है . ये धचठ्ठी डालने के मलए भी पैदल ही जाना पड़ता है और हो सकता है कक जब आप ऊपर से िेरे घर को दे खें तो िेरी िााँ आींगन िें बैिी प र ु ानी साड़ी के पल्लू से ि ीं ु ह नछपाए रोती हुई टदखाई दे जाए. भगवान जी अगर वो रोती हुई टदखाई दे तो एक बार अपनी शश्क्त से उसके िन का द ुः