Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 56

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छोिू की आाँखों िें जोरदार थप्पड़ की वजह से आींसू छलछला गये. उसने डाींककया को बड़े गुस्त्से से देखा और धीरे धीरे वहाीं से चल टदया. डाींककया क्रू र वेशक था लेककन उसके सीने िें भी टदल था. थप्पड़ िारने के बाद उसे छोिू पर दया आ गयी. बोला,“ सुन लडके. इधर आ.” छोिू की गुस्त्सा थोड़े डर िें बदल गयी. उसकी टहम्ित न हुई कक डाींककया के पास चला जाय लेककन डाींककया ने कफर बड़े निच लहजे िें पुकारा,“ अरे भई आ तो सही. बता कहााँ धचट्ठी भेजनी है?”
धचट्ठी भेजने के नाि से छोिू का सारा गुस्त्सा और डर छू िींतर हो गया. वो जल्दी से डाींककया के पास जा पहुींचा और उसकी तरफ अपनी मलखी हुई धचट्ठी बढ़ा दी. बुडूढे डाींककया ने धचट्ठी हाथ िें ली और बोला,“ अच्छा तुझे ये तो पता होगा कक तेरे ये ररकतेदार कौन सी जगह या कौन से श्जले िें रहते है? श्जससे िें उस इलाके के डाींककया को मलखकर बता सकूाँ. बाकी का वो ढू ढ़ ही लेगा.”
छोिू सोच िें पड़ गया. लोगों ने उसे बताया था कक भगवान तो सातवें आसिान िें रहते हैं. कफर वहाीं कौन सा श्जला पड़ता है ये कै से बता पाता. बोला,“ िुझे श्जला तो पता नही लेककन िााँ और बाकी के सब लोग बताते हैं कक भगवान सातवें आसिान िें रहते हैं. क्या आज तक आपके यहााँ उनके मलए कोई धचट्ठी नही आई?”
छोिू ये बात बड़ी िासूमियत से बोल गया लेककन डाींकीया का सर कफर से चकरा गया. बोला,“ क्या तू सचिुच पागल हे रे. तू कौन से भगवान की बात कर रहा है? तेरा टदिाग खराब है. िूखच वहाीं कोई धचट्ठी भेज सकता है क्या?”
इतना कह डाींकीया ने चीट्ठी को खोल पढना शुरू कर टदया,“ आदरणीय भगवान जी. िैं छोिू हूाँ. िैं दानपुर गााँव िें रहता हूाँ. भगवान िैं और िेरा पररवार बहुत गरीब है. हिारे यहााँ खाने के मलए वो सब नही होता जो हिारे पड़ोमसयों के घर िें होता है. भगवान कभी कभी तो हि लोग भूखे ही रह जाते हैं. भगवान िेरी िााँ भी बहुत दुखी रहती है. वो टदन रात रोती ही रहती है.
भगवान जी अभी एक टदन पहले ही िेरे ताऊ ने िेरी िााँ को ववना बात बहुत बुरी बुरी गामलयााँ दीीं थीीं. इतनी बुरी कक अगर वो गामलयााँ ताऊ ने आपकी िााँ को दीीं होती तो आप उनको जान से िार डालते. भगवान िन तो िेरा भी कर रहा था कक ताऊ को िार डालूीं लेककन िैं बहुत छोिा हूाँ और गरीब भी. एक बार को िेरा िन ककया कक िें डाींकू बन जाऊीं लेककन िााँ बोलती है कक िुझे सच्चाई के रास्त्ते पर चलना चाटहए.
ऐसा करने से आप खुश होते हो लेककन भगवान जी जब आप इिानदार लोगों से खुश होते हो तो उन्हें दुुःख क्यों देते हो? िेरी िााँ तो िुझे धरती पर चलने वाली नन्ही चीिीीं को भी िारने से भी िना करती है लेककन इतने पर भी उसे दुुःख ही दुुःख मिलते हैं.
भगवान जी िेरा ताऊ बहुत बुरा आदिी है. िोहल्ले के लोग कहते हैं कक वो बहुत से गरीब लोगों को परेशान