Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Página 54

54 थे . शिच तो छोिू को भी बहुत आ रही थी लेककन उसे अपना काि भी तो ननकालना था. छोिू ने िहात्िा के पास जा उसके पैर छुए. पैर छूते िें छोिू को उस िहात्िा के शरीर से बहुत बुरी द ग न् च ध आई. लोग कहते थे ये अघोरी िहात्िा है . नहाने धोने का काि इन लोगों का नही होता. छोिू ने िहात्िा से सवाल ककया, “बाबा आप को भगवान के बारे िें िालुि है ?” अघोरी बाबा ने गाींजे के नशे से लाल हुई आाँखों को छोिू की तरफ ननकाल कर कहा, “जानता है िैं कौन हूाँ? िैं मसवद्ध पाया हुआ अघोरी बाबा हूाँ . िुझसे भगवान की स