53
तुरींत गेंहूाँ तोल कर देख मलए. बोला,“ तीन रूपये के हैं भई. बता क्या सािान लेगा?” छोिू जल्दी से बोला,“ रूपये दे दीश्जये सािान नही लेना.” दुकानदार छोिे लडके पर हावी हो बोला,“ पागल है क्या? खाली गेंहू बेच पैसा दू ीं तो िुझे क्या बचेगा? चल कि रूपये का सािन ले ले. बाकी का रुपया दे दू ींगा.”
छोिू सोच िें पड़ गया. घर िें खाने के गेहूाँ बड़ी िुश्ककल से आते थे. इन्हें बेकार के सािान िें बबाचद करना छोिू को अच्छा नही लगता था लेककन तभी उसे ध्यान आया कक चूल्हा जलाने के मलए दो िाधचस ले ले. िाधचस घर िें सबसे जरूरी चीज होती है.
घर िें सुबह चूल्हा जलाने से लेकर शाि का दीया जलाने तक िाधचस ही काि आती थी. िाधचस खत्ि होने पर िााँ पडोस से आग िींगा कर घर का चूल्हा सुलगाती थी. छोिू दुकानदार से बोला,“ ऐसा कीश्जये एक रूपये की दो िाधचस दे दीश्जये. बाकी के दो रूपये दे दीश्जये. िुझे दो रूपये का पोस्त्िकाडच लेना है.”
दुकानदार ने छोिू का नन्हा टहसाब सुन उससे ववना बहस ककये दो रूपये और एक रूपये की िाधचस उसके हाथ पर रख दी. छोिू दौड़ कर डाकखाने िें पहुींचा. उस बुडूढे को दो रूपये टदए और मलफाफा ले अपने गााँव की तरफ चल टदया.
सारे रास्त्ते िन फू ला न सिाता था. पता नही छोिू के िन िें धचट्ठी मलखने की ख़ुशी थी या भगवान से कु छ मिलने की उम्िीद, लेककन ख़ुशी तो थी ही. घर पहुींचे छोिू को पता ही न पड़ा कक कब वो एक ककलोिीिर के रास्त्ते को पार कर घर आ पहुींचा.
चुपके से घर की अलिारी िें िाधचस रख दी और भगवान के मलए धचट्ठी मलखने लगा. मलखते िें कभी भावों िें खोया तो कभी खूब रोया. कभी िन खुश हुआ तो ननराशा भी खूब हुई. धचट्ठी पूरी कर लभेड़े के गोंद से उसे धचपका टदया लेककन ऊपर के टहस्त्से पर पता मलखने की बारी आई तो छोिू का टदिाग चकरा गया.
उसे भगवान का पता तो िालूि ही नही था. िााँ से कई बार पूींछा लेककन िााँ कहती तू क्या करेगा भगवान के पते का? अब छोिू िााँ को ये तो न बता सकता था कक उसे भगवान को धचट्ठी मलखनी है. उसने घर िें रखी रािायण उिाई. काफी देर पेज पलिे लेककन भगवान का पता न मिल सका. हााँ बाहर के प्रष्ि पर प्रकाशक का पता जरुर मलखा था लेककन भगवान के पते का उसपर कोई भी श्जक्र नही था.
छोिू उदास हो बैि गया. उसने सुना था कक भगवान सातवें आसिान पर रहते हैं. जहााँ मसफच हवाई जहाज पहुींचता है या कफर डाींककया की भेजी हुई धचट्ठी. लेककन तभी उसे ध्यान आया कक गााँव के िश्न्दर पर रहने वाले िहात्िा को भगवान का पता िालुि होगा.
वो झि से भाग गााँव के बाहर बने िश्न्दर पर जा पहुींचा. यहााँ जो िहात्िा रहता था वो नींगा ही रहता था. लडककयााँ और औरतें तो िश्न्दर पर जाना ही छोड़ चुकीीं थीीं लेककन लोग उसे बहुत‘ पहुींचा’ हुआ साधू िानते