Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 51

51 थी वैसे इन लोगों के मलए कुछ नही है ऊपर से िारपीि हो तो बच्चे ककसी हालत के नही रहें गे. किला ने छोिू के एकदि अपने सीने से लगा मलया और भराचए हुए गले से बोली, “बेिा आज के बाद ऐसा सोचना भी ित. िैं इतनी द ख ी रहकर तुि लोगों को इसमलए नही पाल रही थी कक तुि लोग बड़े होकर चोर डाींकू बनो. िैं तो त ि लोगों को बहुत बड़ा आदिी बनते हुए दे खना चाहती हूाँ . त ि इन द ष् ु िों की बातों िें आ अपना जीवन क्यों खराब करना चाहते हो? यही तो ये लोग चाहते हैं . तुि बड़े होकर इतना बड़ा काि करो कक ये लोग तुम्हें दे ख दे ख कर जल िरें . न कक तुि कोई बुरा काि कर श्जन्दगी भर जेल िें सडो. िेरी िेहनत का फल िुझे तभी मिलेगा जब तुि कोई अच्छा काि करोगे . तुम्हारे स्त्वगीय वपता के अरिान तभी पूरे होंगे जब तुि ईिानदारी की श्जन्दगी जीते हुए कुछ कर सकोगे . तुम्हें पढ़ाने के पीछे िेरा िकसद मसफच इतना ही है . ” रात हुई सब लोग बबना खाना खाए ही चारपाइयों पर जा लेिे . किला ने रािायण ननकाल ली लेककन रािायण खोल कर जैसे ही पढनी शुरू की तो गला भराच गया और आाँखें भर आई. भगवान को दे ख रोना आ गया था. रोज रािायण पढ़ी जा रही थी. पढ़ते पढ़ते सालों ग ज र गये थे लेककन भगवान द ख ों को द र ू करने का नाि नही लेता था. ऊपर से किला ब ह स्त्पनतवार का व्रत भी रखती थी. लगता था जैसे भगवान होते ही नही हैं या कफर भगवान भी इींसान की तरह शोषण करने वाला हो गया है . जो रोज अपनी पूजा तो कराता है लेककन उसका फल नही दे ता. किला तो कुछ ज्यादा िाींगना भी नही चाहती थी. वो तो अपने द ख ों को इतना हल्का करना चाहती थी श्जससे उसके और उसके बच्चों की श्जन्दगी आराि से कि सके . वो भगवान से सोना चाींदी या राजाओीं जैसी सुख सुववधा की िाींग तो न करती थी लेककन भगवान थे कक उन्हें यह सब सिझ ही न आता था. किला ने आींसू पोंछे और रािायण बींद कर रख दी. जब टदल साथ न दे तो पूजा िें भी िन नही लगता. ऊपर से भगवान भी न सुनता हो तो और ज्यादा. मिििी के तेल का दीया टििटििा रहा था. किला को आज इस दीये की धीिी रौशनी से भी परे शानी हो रही रही. बच्चे दीया के उजाले िें ही सोते थे . अाँधेरे िें उन्हें डर लगता इस मलए किला उसे बुझा भी नही सकती थी लेककन अपने सबसे छोिे बच्चे को सीने से लगाये मससक जरुर रही थी. पता नही वो अपनी ककस्त्ित पर रोती थी या कफर द ख ों की सीिा को दे ख रोती थी. लेककन उसका रोना आसपास पड़े तीनों बच्चे िहसूस कर रहे थे . अपने बड़े भाई के पास लेिा छोिू भी अपनी िााँ के द ख ों के बारे िें सोच रहा था. उसने ककसी ककताब ि