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तो सुधर जा नही तो गााँव की िेहतरानी से चप्पल पड़वाऊीं गा. घर से ननकलना िुश्ककल कर दू ींगा. िााँ बटहन की गामलयााँ तो इतनी दीीं कक लोगों ने अपने घरों की औरतों को घरों िें जाने के मलए कह टदया लेककन कोई भी आटदराज से यह न कह सका कक आप एक ववधवा गरीब औरत को इतनी बुरी बुरी गामलयााँ क्यों दे रहे हो?
सब की सोच थी कक आटदराज अिीर आदिी है. इससे बबगड़ कर क्या फायदा? किला की तरफदारी करने से कु छ नही मिलेगा और कफर कौन सा अपने घर की ककसी औरत को गामलयााँ पड़ रही थीीं. यही सोच सब लोग चुप रहे.
आटदराज घींिों खरी खोिी सुनाता रहा. किला को बेइज्जत करने िें उसने कोई कसर नही छोड़ी. जब िुींह थक गया तो चुप हो चला गया. शायद किला की चुप्पी ने उसे उसी की नजरों िें धगरा टदया था. लोग िन ही िन िें आटदराज को नीच और कायर कह रहे थे. जो कक एक गरीब औरत को इतना भला बुरा कह गया था. जबकक वो औरत उसके चचेरे भाई की ववधवा थी. कि से कि इस बात का तो खयाल उसे करना ही चाटहए था.
सब शाींत हो चुका था. किला ने अपने आींसू पोंछे कफर बच्चों को चुप ककया और दोबारा चूल्हा जला टदया लेककन एक भी बच्चे ने खाना न खाया. बच्चों को पता था कक आज िााँ खाना नही खाएगी. बच्चे बड़े हो रहे थे और उनके मलए िााँ के मसवा इस दुननया िें कोई नही था.
वो िााँ की भावनाओीं और उसके हर एक भाव से पररधचत थे. िााँ ककस बात से ककतनी दुखी होती है और ककस बात से ककतनी खुश उन्हें सब पता था. आज उनकी िााँ के िरे हुए पनत को गामलयााँ पड़ी थीीं. उनकी िााँ को बुरी बुरी गामलयााँ पड़ी थीीं लेककन वे तीनों लडके होते हुए भी कु छ न कर पाए थे.
उन्हें पता था िााँ इस बात को सहने के बाद खाना न खा पायेगी. किला ने आिा उिाकर रख टदया. जो आज कई सालों िें पहली बार हुआ था. बच्चे ववना भूख के भी एकाध रोिी शौक िें खा लेते थे लेककन आज तो भूख िें भी उन्हें भूख नही थी.
छोिू िााँ को दुखी देख गुस्त्से से भर उिा. उसके िन िें आटदराज के प्रनत अथाह क्रोध था. िााँ से बोला,“ िााँ िैं बड़ा होकर डाींकू बनूींगा और इस ताऊ को गोली िार दू ींगा. कफर देखूींगा ये तुम्हें कै से गाली देता है. तुि देख लेना...”
छोिू अपनी बात पूरी करता उससे पहले ही किला का थप्पड़ उसके गालों से जा लगा. थप्पड़ इतना तेज था कक छोिू का िुींह सुन्न पड़ गया. वो िााँ की तरफ अजीब नजरों से देखने लगा. उसे अपनी िााँ से इस थप्पड़ की उम्िीद नही थी.
किला भी अपने व्यवहार पर शमिचदा हो गयी. वो अपने भूखे नींगे बच्चों को बहुत कि िारती थी. सोचती