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के मलए ये आसान हो सकता था.
जीतू पडोस के गााँव के सरकारी स्त्कू ल िें पढता था लेककन वो मसफच पाींचवीीं क्लास तक था. आगे की पढाई के मलए पाींच ककलोिीिर दूर एक स्त्कू ल था. किला ने खुद पैदल जा कर जीतू का उस स्त्कू ल िें एडूमिसन करा टदया.
जीतू की उम्र इतना पैदल चलने की नही थी लेककन जाना तो पड़ता ही था. किला अपने सपनों को साकार करना चाहती थी. जो उसके बच्चो की पढाई मलखाई से ही साकार हो सकते थे. कु छ टदन बाद छोिू का नाि भी उसी स्त्कू ल िें मलखवा टदया.
स्त्कू ल की फ़ीस ज्यादा थी इसमलए दो बच्चों की फ़ीस किला से नही दी जा रही थी. स्त्कू ल वालों ने छोिू का नाि स्त्कू ल के रश्जस्त्िर से काि टदया था लेककन किला की गरीबी को देखते हुए छोिू को ववना नाि मलखे ही क्लास िें पढने टदया गया. दोनों बच्चे पैदल स्त्कू ल जाते और िन लगाकर पढ़ते थे लेककन घर की तींग हालत के चलते कभी पेन नही होता था तो कभी कॉपी नही होती थी परन्तु कफर भी पढाई न रुकी.
किला ने खेत िें जब अरहर की थी तो रेक्िर वाले से आटदराज के खेत िेढ़ थोड़ी सी कि गयी थी लेककन इस बात िें किला की तो कोई गलती थी ही नही. साथ ही इस बात से आटदराज का भी कोई नुकसान नही हुआ था लेककन आटदराज काफी टदनों से किला को बुरा भला सुनाने की ताक िें घूि रहा था.
उसने इसी बात का बतींगड बना टदया. शाि का सिय था. किला चौका िें बैिी रोिी बना रही थी. तीनों लडके उसे घेरे हुए बैिे खाने के मलए आपस िें बहस कर रहे थे. एक दूसरे िें इस बात की बहस थी कक सबसे पहली रोिी कौन खायेगा? गााँव िें कहतें हैं कक पहली रोिी खाने वाला सबसे अधधक बुवद्धिान होता है लेककन इन बच्चों को इस बात से ज्यादा अपनी भूख बुझाने की धचींता थी.
तभी किला के घर के बाहर से आटदराज की जोरदार आवाज आने लगी. किला चौका से उिी और दरवाजे के पीछे कान लगा आटदराज की बात सुनने लगी. आटदराज किला और उसके िृतक पनत का का नाि ले ले कर िााँ बटहन की गींदी गींदी गामलयााँ दे रहा था. वो किला को बाहर ननकल कर आने के मलए भी ललकार रहा था. सारा िोहल्ला और उसके लोग नपुींसक बने आटदराज की गामलयों का आनींद ले रहे थे.
किला ने डर के िारे अपना दरवाजा बींद कर मलया. झिपि चौका िें गयी और चूल्हे िें पानी डाल आग को बुझा टदया. बच्चे भी डरकर िााँ से धचपक गये. किला तीनों लडकों को ले चौका िें ही बैि रोने लगी. प्लेिों िें रोटियों के िु कड़े अब भी पड़े थे लेककन एक भी बच्चे का खाने का िन नही था. किला को डर था कक कहीीं आटदराज उसके घर िें घुसकर उसे और उसके बच्चों को िारने न लगे क्योंकक किला ने आटदराज और उसके भाई के हाथों अपने पनत को भी वपिते हुए देखा था.
आटदराज बाहर बैिा अब भी धचल्ला धचल्ला कर किला को गामलयााँ टदए जा रहा था. कहता था कक या