Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 48

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पर अपना हाथ कफराया. नन्ही के चेहरे पर आींसुओीं की लम्बी लम्बी लकीरें थीीं. किला जान गयी कक उसकी िासूि बच्ची आज खूब रोई है. किला ने नन्ही को जगाना शुरू ककया लेककन नन्ही ने कोई आवाज न दी.
किला का िन भय से भर गया. उसे अनहोनी की आशींका हो उिी. उसके कई बच्चे पहले इसी तरह इस दुननया को छोड़ चले गए थे. किला ने झकझोर कर नन्ही को उिाया लेककन नन्ही तो जीववत ही नही थी. किला की करुणाियी चीखों से गााँव दहल उिा. नन्ही िर चुकी थी. लोगों ने मिलकर नन्ही को गााँव के तालाब िें दफना टदया क्योंकक परम्परा के अनुसार बच्चों को जलाया नही जाता था.
आज कफर से किला का एक बच्चा कि हो गया था. नन्ही सी उम्र िें नन्ही का इस तरह जाना किला के मलए बहुत दुखद था. लगातार िौतों से जूझ रही एक औरत के मलए ये एक और दुुःख था. कई टदनों तक किला नन्ही को याद कर कर के रोती रही.
खेत िें गुड़ाई को पड़ी अरहर और बेिी का िर जाना. किला दो तीन टदन बाद ही खेतों पर अरहर की गुड़ाई के मलए ननकल पड़ी. उसे अपने बाकी श्जन्दा बच्चे बच्चों की भी कफकर थी. अरहर खराब होने से घर िें खाने के लाले पड़ सकते थे.
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कफर जब अरहर पक गयी तो किला ने अपने बेिे के साथ उसे काि डाला. किी पड़ी अरहर को किला और जीतू ने सिेि कर एक जगह कर टदया. जब अरहर की वपिाई हुई तो िालुि पड़ा कक श्जस तरह की अरहर की फसल हुई थी उसिें उतना अरहर दाना नही ननकला. अरहर की लडकी बहुत िोिी थी लेककन दाना बहुत कि.
कु छ तो फली पकने के कारण खेत िें ही बबखर गया था. किला अरहर का दाना जब ले जब अनाज िण्डी िें पहुची तो पता पड़ा इस बार अरहर के दाि बहुत कि हैं. कु छ बड़े ककसान तो अरहर लौिा लौिा कर घर को ले गये थे.
श्जससे जब अरहर िहींगी हो तब बेच सकें लेककन जो छोिे ककसान थे वे फसल को अधधक सिय तक घर िें रोक नही सकते थे. उन्हीीं िें से एक किला भी थी. किला ने सस्त्ते िें ही अरहर बेच दी. जब हाथ िें पैसा आया तो पता पड़ा कक िीक से लागत भी नही मिल पायी.
किला ने घर आ ननकचय ककया कक खेत को कफर से पट्टे पर उिा टदया जाय. किला को इस फसल के िूल्य से अधधक तो पट्टे के रुपयों िें ज्यादा फायदा होता था. ऊपर से टदन भर खेती िें काि भी नही करना पड़ता था. किला ने पहले कभी खेती की भी नही थी इस वजह से उसको पता ही न होता था कक ककस सिय क्या करना चाटहए. ऊपर से चार छोिे छोिे बच्चों को पालना कफर खेती करना. शायद ही ककसी औरत