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किला दानपुर गााँव पहुींच चुकी थी. दो टदन बाद ही किला का भाई नन्ही को वहाीं छोड़कर चला गया. अब किला पर चार बच्चों को पालने और पढ़ाने की श्जम्िेदारी थी. नन्ही ने अपने घर आ पेि भर भर कर खाना शुरू कर टदया था. कभी कभी तो वो इतना खा जाती कक उसे खाते खाते ही उलिी होने लगती. किला उसे अक्सर सिझाती,“ बेिा नन्ही थोडा थोडा खाया करो. खाना कहीीं भगा तो नही जा रहा.”
नन्ही बड़ी िासूमियत से बोलती,“ िााँ अगर ककसी टदन तुि भी नानी की तरह िुझे खाना देना बींद कर दो तो? कि से कि अभी पेि भर भर कर खाऊाँ गी तो कि से कि तब इतना िन तो नही चलेगा न.” नन्ही की बात सुन किला उसे देखती ही रह जाती.
उस पर उस नन्ही लड़की नन्ही के सवाल का जबाब नही था. नन्ही कु छ ही टदनों िें इतनी स्त्वस्त्थ हो गयी कक घर के सब लोग उसे ' िोिी ' कहकर बुलाने लगे. रींगत भी साफ़ हो गयी. कद कािी भी बढ़ गया. पेि भर भोजन ने उसके शरीर को पूरी तरह बदल कर रख टदया.
किला ने अब रात को सोने से पहले चारों बच्चों को अपने पास बबिा रािायण सुनाना शुरू कर टदया था. लोगों ने किला को बताया था कक रोज रािायण पढने से घर का दमलद्दर( गरीबी) खत्ि हो जायेगा. शाि को चारपाई पर बैिने के बाद रािायण पढ़ी जाने लगी. किला और जीतू रािायण की चौपाई पढ़ते थे और बाकी के बच्चे बड़े रोिाींधचत हो सुनते थे. छोिू और कयाि हर चौपाई पर अपनी िााँ से पूींछते,“ िााँ अब क्या हुआ?”
किला चौपाई का अथच करके बताती,“ अब रािजी ने रावण को िार टदया या अब लक्ष्िण जी ने िेघनाथ को िार टदया.” बच्चों िें रािायण जोश भर देती और साथ ही कहानी का आनींद भी प्रदान करती थी. कभी कभी तो किला बच्चों को डाींि देती थी.
क्योंकक वे हर चौपाई पर पूींछते,“ िााँ अब क्या हुआ. क्या राि जी ने कोई और भी िार टदया क्या?” अब हर चौपाई िें थोड़े ही न कु छ हो जाता था लेककन बच्चों को तो पूरी कहानी जानने की उत्सुकता रहती थी.
रािायण पढने से गरीबी तो दूर न हुई लेककन बच्चे बड़े धामिचक हो गये. जीतू टहींदी िें ननपुण हो गया. छोिू को कहाननयाीं पढने का शौक हो गया और कयाि तो टदन भर लक्ष्िण बना घूिता था. गरीबी तो टदनोटदन बढ़ रही थी लेककन किला इसे भगवान की परीिा िान सहती जा रही थी.
एक टदन रािायण पढ़ते पढ़ते ही जीतू ने अपनी िााँ से कहा,“ िााँ क्यों न हि लोग अपने खेत को खुद बोयें और कािें. जब पट्टेदार हिें खेत का पट्टा देकर अपना िुनाफा किाता है तो क्या खेत िें किाई नही होती होगी?”
किला को जीतू की बात सही लगी लेककन दो ककलोिीिर दूर तक पैदल चलना और कफर खेती करना बहुत