Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 42

42 पहले पूींछा, “मिल गयीीं रोटियाीं?” छोिू का पूरा शरीर कााँप गया. बोला, “मिल तो गयी लेककन...” तीनों लोग उसके चेहरे को बड़ी अधीरता से दे खने लगे . िानो छोिू कोई बहुत बड़ी बात कहने वाला हो. जीतू की अधीरता तो जबाब ही दे गयी. उसे लगता था ककसी ने उससे रोिीयाीं छीन ली होंगी. बोला, “लेककन कफर क्या हुआ? क्या ककसी ने रोटियाीं ननकालते हुए तुम्हें दे ख मलया या ककसी ने त ि से रोटियाीं छीन लीीं?” यह बात कहते हुए जीतू की अधीरता अपने चरि पर थी. लगता था कक उसे रोटियों के बारे िें न बताया गया तो पागल हो उिे गा. शायद ये उसके पेि की भूख थी. छोिू ने डरते डरते कहा, “वो चारो रोिीयाीं िैने खा लीीं . िुझे िाफ़ कर दे ना भैय्या. रोटियाीं दे ख िुझसे रुका ही न गया. िुझे बहुत तेज भूख तो लग ही रही साथ ही उस रोटियों की खुकबू ने और ज्यादा भूख लगा दी. घी की चुपड़ी हुई ऐसी रोटियाीं तो िैने आज तक खायीीं ही न थीीं लेककन जब तुि लोगों का ध्यान आया तो िैं बहुत शमििंदा हुआ . िुझे इस बात के मलए िाफ़ कर दे ना.” जीतू को भी बहुत भूख लगी हुई थी. उसे छोिू पर गुस्त्सा भी बहुत आया और तरस भी बहुत आया. उस पता था जब अथाह भूख िें रोटियाीं सािने होती है तो क्या होता है ? आदिी द स रे आदिी को िार तक सकता है . जीतू ने उदास हो छोिू से कहा, “यार िैं और नन्ही तो रोज ही भूखे से ही रहते हैं . हिें तो आदत सी पड गयी है भूखे रहने की. िैं तो इस कयाि की वजह से कह रहा था. ये हि सब से छोिा है . पता नही इस ककतनी भूख लग रही होगी?” छोिू ने ग्लानी िें हो कयाि की तरफ दे खा. वो नन्हा लड़का चेहरा लिकाए खड़ा था. आाँखें दे ख लगता था ककसी भी सिय रो पडेगा लेककन छोिू को इस बात पर बहुत ताज्ज ब हो रहा था कक उसका भाई जीतू और नन्ही रोज ही भूखे रहते हैं. उसने जीतू से पूींछा, “भैय्या क्या नानी तुम्हें खाना नही दे ती?” जीतू की आाँखें भर आयीीं . बोला, “नानी रोिी तो दे ती है लेककन मसफच जीने लायक. सुबह आधी या एक रोिी और इसी तरह शाि को. िैं और नन्ही शुरू िें तो भूखे ही रहते थे लेककन धीरे धीरे हिने लोगों से रोटिया िाींगना शुरू कर टदया. हि लगभग रोज ही ककसी न ककसी से रोटियाीं िाींगकर खाते हैं लेककन एकाध टदन ऐसा भी जाता है श्जस टदन हि लोग रोटियाीं िाींग नही पाते और उस टदन हि लोग भूखे ही सो जाते हैं . आज जो रोटियाीं तुि कूड़े से ननकाल कर खा आये हो वो भी एक लडके से िाींगी थीीं लेककन अचानक नानाजी आ गये . िैंने डर के िारे उन्हें कूड़े के ढे र िें छुपा टदया. जब भी नानी को ककसी से रोटियाीं िाींगने की खबर मिलती है तो नानी हिें बुरी तरह से िारती हैं. इसमलए हि लोग बहुत छुपकर रोिी िाींगते हैं . ”