Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 36

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िेरे घर िें इतना भी नही कक कोई आ जाय तो िें उसको िीक से चाय पानी भी करा सकूाँ. कफर िैं क्यों न ये सब काि करूाँ? आप का एक बेिा सरकारी नौकरी वाला है. आप खुद इतने बड़े जिीींदार है. कफर िैं आप की बराबरी कै से कर सकती हूाँ?
अगर िैं घर िें बैिी रही तो भूखों िर जाउीं गी. तब कहााँ रहेगी खानदान की इज्जत. अगर आप सब खानदान वाले चाहते हो कक िैं खेतों िें काि न करूीं तो आप लोग िेरे घर का खचाच उिाने के मलए तैयार हो जाओ. िैं आज के बाद घर से ही ननकलना बींद कर दू ींगी.”
चींदा खुद एक औरत थी. किला की बात सुन उसे उसकी िजबूरी का आभास हो गया था लेककन किला के जबाब िें भी करारापन था. श्जसके सािने चींदा के िुींह से बात ही न बनी. किला की बात सच थी. अगर उसके घर का खचच कोई उिा ले तो वो क्यों जगह जगह भिकी डोले? क्यों भीषण गिी िें बच्चे को पीि पर डाले खेतों िें काि करती कफरे?
श्जतनी भीषण गिी किला सहती थी उतनी ही गिी किला का सबसे छोिा लड़का कयाि भी सहता था. खेतों के ककनारों पर किला उसे सुलाती तो साींप बबच्छू के खाने का डर भी लगा रहता था. शायद एक िााँ के मलए ये सब इतना आसान नही होता लेककन श्जन लोगों ने ऐसी िुश्ककलों का सािना ककया ही न हो वे यह सब कै से जानें? श्जन लोगों का ध्येय दूसरों को कु चल आगे बढने का हो वे ककसी की िुश्ककल कै से सिझें?
चींदा अपना बुझा सा चेहरा ले किला के घर से चली गयी. आटदराज ने भी जब किला की बात को चींदा से सुना तो नतलमिला कर रह गया लेककन करे क्या? जो बात किला ने कही उसका जबाब भी तो नही था आटदराज के पास.
वो किला के घर का खचच उिाने की सोच भी नही सकता था. वो तो मसफच ये चाहता था कक किला उससे ब्याज पर पैसा ले और अपनी बाकी की जिीन उसके नाि मलख डाले. जो किला कभी नही चाहती थी. कि से कि बच्चे जब तक बड़े नही होते तब तक तो कभी भी नही.
आटदराज की इस तरह बात न बनी तो उसने किला के वपता रािचरन को भी खबर मभजवा दी. उसने कहलवाया कक किला से कहें कक वो इस तरह खेत खेत िजदूरी न करती कफरे. इस बात से इस खानदान और बबरादरी की नाक किती है. रािचरन किला की हालत को जानते थे. उन्होंने आटदराज की बात को सुना तो सही लेककन किला को सिझाने की टहम्ित न कर सके. शायद उन्हें चींदा की तरह किला से करारा जबाब सुनने का डर रहा होगा.
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किला की बबरादरी िें कई औरतों के गरीबी रेखा वाले काडच बन चुके थे. श्जन पर उन्हें राशन की दुकान