Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 34

34 स्त्कूल िें दाखखल करा टदया गया और नन्ही को घर के काि मसखाये जाने लगे . किला की िााँ स श ीला का व्यवहार इन बच्चों के प्रनत बहुत सख्त था. उसी की वजह थी जो नन्ही को स्त्कूल िें दाखखल नही ककया गया था. वो खुद पढ़ी मलखी नहीीं थी. कहती थीीं लडककयों को पढ़कर क्या करना ककन्तु नन्ही सी नन्ही का बहुत िन था कक वो स्त्कूल पढने जाए लेककन ये सींभव नही था. रािचरन अपनी पत्नी के सािने इस बात का ववरोध भी न कर सके . किला भी अपनी िााँ के सािने कुछ न बोल सकी. सोचती थी कक ये क्या कि है कक िााँ उसके बच्चों को अपने घर रखने के मलए तैयार हो गयी. किला की बची ख च ी खेती का पट्टा चार सौ रूपये बीघे आना था. ितलब दस बीघे का चार हजार रूपये सालाना. जबकक इतना पैसा तो एक सरकारी बाबू को एक िहीन की पगार से मिल जाता था. ऊपर से ररकवत और फींड बोनस अलग से . छोिे ककसान की यही दशा होती है . जो सबका पेि भरता है वही एक टदन खुद भूखा िर जाता है . किला के पास अब सबसे छोिे दो लडके ही रहते थे . जो अभी तक छोिे छोिे थे . उनिे से सबसे छोिा कयाि श्जस टदन पैदा हुआ था तब से लेकर आज तक िीक से खा पी तक न सका था. भैंस का द ध तो उसने एक धगलास भी पेि भर न वपया था और किला को तो ख द खाने के मलए नही था कफर बच्चे को कहााँ से अपना द ध वपलाती? कयाि की शक्ल दे खकर कुपोषण के ववज्ञापन वाला लड़का नजर आता था. आाँखें गडूढे िें धींसी हुई थीीं और पेि बाहर ननकला हुआ था. शरीर की हडूडडयााँ किजोर और नतरछी थीीं . छोिू की भी हालत इससे कुछ ज्यादा अलग नही थी लेककन वो कयाि से काफी अच्छा था. ककन्तु वो हर चीज को बहुत ध्यान और गहरे तरीके से सोचता था. वो अपनी िााँ की हालत दे ख कर भी बहुत द ख ी होता था. िोहल्ले की अन्य श्स्त्रयों के िुकाबले अपनी िााँ को बहुत छोिा पाता था. वे बहुत खुश रहती थीीं लेककन उसकी की िााँ हिेशा द ख ी और बीिार. िोहल्ले की श्स्त्रयााँ नई साडड़यााँ और गहने पहने रहती थीीं और उसकी िााँ . ? उसे क्या पता था कक उसकी िााँ ववधवा है . छोिू ने ये भी िहसूस ककया कक लोग िोहल्ले के शुभ कायों िें उसकी िााँ को नही बुलाते . लोग सोचते थे कक ववधवा औरत को श भ कायों िें बुलाना िीक नही है लेककन ऐसा हर आदिी नही करता था. कुछ लोग बहुत अच्छे भी थे . परन्तु परम्पराओीं के आगे उनकी भी नही चलती थी. *** किला ने छोिू को गााँव िें ही पढने बबिा टदया था. इस गााँव िें एक औरत अपने घर िें ही बच्चों को पढाने का काि करती थी. अब किला गााँव की अन्य िटहलाओीं के साथ खेतों िें जा जा कर काि करन