Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 33

33 टदशा को शहर ले जाते ही शोभराज के घर वालों ने उससे नौकरानी की तरह काि लेना शुरू कर टदया था. घर के झाड़ू पोंछा से लेकर बतचन िाींजना और कपड़े धोना सब टदशा से ही करवाया जाने लगा. टदशा सुबह से काि करना शुरू करती और काि ननपिाते हुए उसे रात हो जाती थी लेककन इस िासूि लडकी को काि करने से कोई ग र ु े ज नही था. इससे ज्यादा काि तो वो अपने घर करती थी. उसे सबसे ज्यादा िलाल इस बात का था कक वो अपने घर से द र ू थी. उसकी िााँ या उसके भाई बटहन उसके पास नही थे . जब भी टदशा से कोई गलती होती थी तो शोभराज या उसकी पत्नी टदशा की वपिाई कर दे ते थे . तब टदशा को अपनी िााँ सबसे ज्यादा याद आती थी. वो छुप छुप कर खूब रोती थी लेककन बाद िें अपनी िााँ की कही बात ध्यान आ जाती. िााँ ने टदशा से कहा था कक ताऊ के घर पहुींच कोई गलती ित ककया करना. बस इसी बात को सोच टदशा कफर से शोभराज और उसके घरवालों को िाफ़ कर दे ती थी. लेककन शोभराज को इस बात की कोई शिच नही थी कक वो किला से क्या वायदा कर टदशा को यहााँ लेकर आया था. न तो टदशा को स्त्कूल भेजा और न ही उसे अपनी बच्ची की ही तरह रखा. बस सारा टदन नौकरानी से भी बदतर तरीके से काि कराता था. जबकक टदशा की उम्र अभी इस लायक नही थी कक वो यह सब कर सके . साथ ही गलती होने पर इन लोगों की वपिाई भी सह सके. साथ ही जब से शहर लाया था तब से एक भी बार टदशा को उसकी िााँ के पास घ ि ाने न ले गया था. दरअसल शोभराज चाहता ही नही था कक टदशा अपनी िााँ के पास जाए या उससे मिले . इधर बड़ा लड़का जीतू और नन्ही भी बड़े हो रहे थे . दोनों की उम्र स्त्कूल जाने लायक थी लेककन किला के पास तो इन बच्चों का पेि भरने के मलए खाना नही था पढाई कैसे करा पाती? परन्तु िााँ अपने बच्चो के मलए कुछ भी कर सकती है . किला ने अपने वपता रािचरन से सारी परे शानी कह सुनाई. रािचरन की आिदनी पहले से बढ़ गयी थी. उनके चारो लडके यानन किला के चारो भाई अब पैसा किाते थे . रािचरन ने किला से कह टदया कक वे ककसी को भेज नन्ही और जीतू को अपने पास बुलवा लें गे . साथ ही नन्ही का लालन पालन और जीतू की पढाई का खचाच भी उिा लें गे . किला के मलए इससे ज्यादा ख़ श ी की बात और क्या होती? उसके सीने से बहुत सा बोझ हल्का हो गया था. किला का सपना था कक उसके बच्चे इतने पढ़ जाएाँ कक शहर िें उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाए. बच्चों की पढाई को लेकर किला बहुत सजग थी. जीतू और नन्ही नानी के घर जाने की बात सुन कर बहुत खुश हुए थे लेककन िााँ के साथ न जाने का द ुः ु ख भी था. किला का ए क भाई किला के घर आ दोनों बच्चों को जूनपुर ले गया. जहााँ पर जीतू को