Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 32

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गुरबत िें सब कु छ हो सकता है. गुरबत िें िहान से िहान राजा घास की रोिी भी खा सकता है.
टदशा भी जानती थी इसके अलावा उसके पास कोई चारा नही है. वो िााँ की तरफ चुपचाप खड़ी देखती रही. किला ने जल्दी जल्दी से टदशा को साड़ी पहना दी. पहना क्या दी लपेि दी. टदशा साड़ी पहने बड़ी अजीब सी लग रही थी. फू ल सी बच्ची के साथ ये भगवान का मसति था जो उसका नारीत्व ढकने तक को कपड़े न दे सका.
पता नही तब उसकी आाँखें होती भी थीीं या नही. टदशा का टदल बार बार भगवान को यही कह कह कर कोसता धधक्कारता था लेककन भगवान ने एक भी न सुनी. न फररयाद और न टदशा का धधक्कारना. कफर भगवान ही क्यों सुने? ककसी अबला स्त्री की तो धरती का इन्सान भी नही सुनता.
टदशा अभी साड़ी पहन कर िीक से खड़ी भी न हुई थी कक शोभराज आ पहुींचा. टदशा को इस हालत िें देख बोला,“ अरे शूि पहन लेती टदशा. अच्छा शूि होगा नही. चलो कोई टदक्कत नही. शहर पहुींच िैं खुद टदलवा दू ींगा.”
जो बात किला शोभराज से कहने वाली थी वो शोभराज ने खुद कह दी थी. किला ने टदशा की तरफ बड़े लाड से देखा. टदशा की आाँखें जाने का नाि सुन कफर से डबडबा गयीीं थी. किला ने एक बार कफर से टदशा को अपने टदल से लगा मलया.
शोभराज ने िााँ बेिी को मिलते देखा तो बोल पड़ा,“ किला अब िैं टदशा को लेकर चलता हूाँ. ज्यादा देर होने से रास्त्ते िें अाँधेरा हो जायेगा.” किला ने हााँ िें सर टहलाया और टदशा को अपने से अलग कर बोली,“ चलो बेिा अब जाओ और ताऊ के घर िीक से रहना. कोई भी ऐसा काि न करना श्जससे ये लोग गुस्त्सा हो तुम्हारी मशकायत हिसे करने आयें. जब भी िेरी या भाईयों की याद आये तो ताऊ को बता देना. वे तुम्हें यहााँ घुिा ले जायेंगे.”
टदशा ने रोते हुए िााँ की बात पर हााँ िें सर टहला टदया और शोभराज के साथ घर से बाहर चल पड़ी. घर को छोड़ कर जाना ककसी छोिी लडकी के मलए बहुत िुश्ककल होता है. शोभराज िोिर बाइक पर टदशा को बबिा शहर की तरफ चला गया. किला दरवाजे पर खड़ी खड़ी टदशा को जाते देखती रह गयी.
साथ िें बच्चे भी खड़े इसी तरह देख रहे थे. घर से एक लडकी कि हुई थी लेककन किला को लगता था जैसे घर िें कोई रहा ही नही है. परन्तु एक उम्िीद थी किला को श्जसकी वजह से टदशा के घर से जाने का दुुःख इतना नही लग रहा था. उसे शोभराज से बहुत उम्िीद थी. टदशा की पढाई से लेकर अच्छे घर िें उसकी शादी तक की उम्िीद. एक िााँ के मलए इतना बहुत था.
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टदशा को घर से गये काफी टदन हो गये थे लेककन उसकी कोई खबर अभी तक किला को नही मिली थी.