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अलग करना चाह रही थी. ये बात सच थी कक वो टदशा के पालन पोषण िें किी िहसूस करती थी लेककन इसका ितलब ये तो नही कक अपनी बच्ची को ककसी और के यहााँ भेज दे.
किला का िन भावुक हो गया. यूाँ तो किला के पास अपनी खुद की दो लड़ककयाीं थी लेककन उनिें से ककसी एक को भी अपने से अलग करके रहना किला के मलए इतना आसान न था. ये बात भी सच थी कक किला का स्त्नेह लडकी से ज्यादा लडकों के मलए था. लेककन ये उसकी अपनी लडककयाीं थीीं. इन लड़ककयों ने उसकी खुद की कोख से जन्ि मलया था. किला के मलए पाींच बच्चों िें अपने प्यार का बींिवारा करना ज्यादा कटिन नही था.
लेककन मसक्के के दो पहलुओीं की तरह किला के टदल का एक पहलू इस बात का सिथचन भी करता था कक टदशा को शोभराज के साथ उसके घर भेज दे. भूख से बबलबबलाते बच्चों को देख किला का टदल भी तो रोता था. दूध की एक एक बूाँद को तरस रहे बच्चों को देख उसका िन भी तो चाहता था कक वो पेि भर दूध वपयें.
टदशा की उम्र तो स्त्कू ल जाने लायक थी लेककन आज तक ककताब के भी दशचन न कर पायी थी अभागन लडकी. जहााँ पेि के मलए रोिी के लाले पड़े हों वहाीं ककताब ककसको चाटहए. ऐसे बच्चों के मलए ककताब रद्दी का कागज िार हो सकती है और हो सकता है कक वे ककताब िें छप रही खाने की चीजों को देख और ज्यादा लालनयत हो उिें. लेककन भूखे पेि पढना...?
किला सहिी सी आवाज िें शोभराज से बोली,“ दद्दा ये लडकी अके ली रह नही पायेगी आपके घर. यहााँ एक घींिे भी िुझसे अलग नही रह पाती. पता नही आपके घर इतने लम्बे सिय तक कै से रहेगी? आप इसे ले जाओगे तो आपको ही परेशानी होगी. ये रोज यहााँ आने की श्जद करेगी.”
शोभराज ककसी भी तरह टदशा को अपने घर ले जाना चाहता था. आखखर उसे इससे सस्त्ती नौकरानी कहााँ मिलने वाली थी. बोला,“ देखो किला िैं तुिसे इतना वादा कर सकता हूाँ कक इस लडकी की श्जन्दगी बना दू ींगा. इसे अपनी सगी लडकी की तरह पढ़ा मलखा कर इसकी शादी बहुत अच्छे घर िें करा दू ींगा. इस लडकी के तुम्हारे पास रहने से अच्छी तरह रखूाँगा. ये श्जम्िेदारी िेरी होगी कक इसे कोई दुुःख न हो पाए.”
किला थोड़े सोच िें पड़ गयी. हकीकत ये थी कक शोभराज के लुभावने प्रयास ने किला के टदल को निच कर टदया था और कौन िााँ ऐसी होगी जो अपने बेिे या बेिी के मलए अच्छा न सोचे. ये बात भी सच थी कक जो हालात किला के इस सिय थे उन हालातों िें टदशा की शादी ककसी खाते पीते घर िें होना ककसी सपने जैसा था.
साथ ही टदशा पढ़ भी नही सकती थी. किला खुद चौथी क्लास तक ही पढ़ सकी थी. वो खुद अपने बचपन िें पढना मलखना चाहती थी लेककन सब सपना ही रह गया. कि से कि आज शोभराज के घर भेजने से