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थी. बोला,“ भाई साहब क्या किला अपनी लडकी को िेरे साथ भेज देगी और कहूाँगा भी क्या कक ककस बात के मलए ले जा रहा हूाँ?”
आटदराज ने थोडा सोचा कफर बोला,“ बात तो सही कहते हो लेककन इसका हल िेरे पास है. तुि किला के पास जा कहना कक तुि उसकी लडकी को पढाओगे मलखाओगे. बटढया घर िें उसकी शादी कर दोगे. वो भी खुद के पैसे से और जब किला इस रहिोकरि का कारण पूींछे तो बताना कक घर पर तुम्हारी बीबी अके ली रहती है. टदशा के जाने से उसका िन लग जायेगा. बस कफर किला ख़ुशी ख़ुशी लडकी को तुम्हारे साथ भेज देगी.”
शोभराज को अपने बड़े भाई का ववचार अच्छा लगा. बोला,“ िीक है भाई साहब. िैं अभी जाकर बात करता हूाँ. अगर ऐसा हुआ तो सिझो िेरा बहुत खचाच बच जायेगा लेककन भाई साहब अगर िुझे उस लडकी की शादी करनी पड़ी तो खचाच तो कफर भी पड़ेगा?”
आटदराज बड़े रुतवे से बोला,“ एक नौकरानी की दस साल की किाई जोड़ ले. कफर तुझे पता पड जायेगा कक ककतना खचाच पड़ेगा और कफर तू मलख कर थोड़े ही न दे रहा है कक बहुत अिीर घर िें उसकी शादी करेगा. अरे तेरे शहर िें तो बहुत सारे फै क्री िजदूर हैं. ककसी ऐसे ही आदिी को ढूींढ कर इस लडकी की शादी कर देगा. सिझ ले िुफ्त िें शादी हो जाएगी.”
शोभराज का चेहरा ख़ुशी से खखल उिा. बोला,“ भाई साहब चालाकी के िािले िें तो आप िुझसे भी आगे हो. िुझे इस बात का ववचार सपने िें भी नही आया था. अच्छा अब िैं किला के पास जा इस बारे िें बात करता हूाँ.”
आटदराज ने हााँ िें सर टहला टदया. शोभराज वहाीं से सीधा किला के घर की तरफ चल टदया. िन िें ख़ुशी थी लेककन पत्थर टदल इन्सान ने एक भी बार उस नन्ही लडकी के बारे िें न सोचा श्जसका कक ये जीवन बबाचद करने जा रहा था. कि से कि उस िासूि को तो बख्श सकता था.
किला के घर की हालत इस वक्त सबसे बुरी थी. इस बार खेती के पट्टे का एक भी रुपया घर िें नही आया था और न ही अनाज का एक दाना. किला ने बच्चों के साथ मिलकर खेतों से गेहूाँ की बालें बीननी शुरू कर दीीं. ये बालें खेतों िें फसल किने के बाद धगर पड़ती हैं. श्जन्हें ककसान खेत िें ही पड़ी छोड़ देते हैं लेककन गरीब लोग इन्हें बीनकर अपना काि चला लेते हैं.
यही काि किला ने शुरू कर टदया था. पेि की भूख इन्सान से कु छ भी करवा सकती है. एक ककसान का घर दूसरे ककसानों के खेत िें गेहूाँ के दाने बीनकर अपना पेि भरने पर िजबूर था. किला की गोद िें एक नन्हा बच्चा भी था श्जसे वो खेतों िें पेड़ के ककनारे सुला देती थी. बाकी के बच्चे उसके साथ गेहूाँ की बालें बीनते थे.