Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 25

25 भी बच्चे जिकर लड़ते थे . क्योंकक बच्चों को लगता था कक िााँ ने द स रे भाई या बटहन को उससे ज्यादा चाय दी है . जबकक किला तो सब बच्चों को इसी वजह से बराबर चाय दे ती थी. चाय के बाद बच्चों की नजर उस बाकी बचे द ध पर होती थी जो सवा सौ एिएल िें से एक बार चाय बनाने के बाद बचा होता था. उस उबले हुए द ध की खुशबू बच्चों को पागल ककये रहती थी. कफर श्जसको भी िौका मिलता वही िााँ स नछप कर द ध की नन्ही सी िलाई चि कर जाता. कोई उस थोड़े से बचे द ध िें रोिी का िुकड़ा डूबा उस द ध का स्त्वाद ले लेता था. द ध के मलए बच्चों का तरसना दे ख किला की छाती फिती थी. वो टदन रात भगवान से अपनी परे शानी को खत्ि करने की द आ ए करती रहती थी. अब तो किला ने ब ह स्त्पनत वार को व्रत रहना शुरू कर टदया था. िोहल्ले की ककसी औरत ने किला को बताया था कक ब ह स्त्पनतवार को भगवान बबष्णु का टदन होता है . अगर वे प्रसन्न हो जाए तो घर की सारी िुश्ककलें जाती रहती हैं . किला को ये ववचार बहुत पसींद आया. इसिें एक तो भगवान की पूजा हो जाती थी. द स रा व्रत रहने के कारण एक टदन का अनाज भी बच जाता था. परन्तु िहीने िें पन्रह टदन भूखे पेि सोने वाली किला की दे ह वपींजर होती जा रही थी लेककन भगवान की कृपा होने की आस उसे हर वो काि कराए जाती थी श्जसे किला करने िें बहुत िुश्ककलों का अन भ व करती थी. किला ने इस घर िें आ श्जतना सुख दे खा था अभी उससे कही ज्यादा द ुः ु ख वो भोगे जा रही थी. लेककन उसे ये तो पता ही न था कक उसने ऐसा क्या कर टदया श्जससे भगवान ने उसे इतनी द ख ों वाली श्जन्दगी जीने के मलए िजबूर कर टदया. भगवान से यही सवाल द न ु नया की वो हर औरत करती है जो किला जैसा जीवन जी रही होती है . लेककन जबाब..? *** शोभराज शहर से गााँव आटदराज के घर आया हुआ था. बातों बातों िें ही शोभराज ने अपने बड़े भाई स कहा, “भाई साहब. गााँव िें कोई घर का काि करने वाली लडकी या औरत हो तो बताओ. तुम्हारी बहू पर काि नही होता. शहर िें नौकरानी तो मिलती हैं लेककन वे एक या दो घींिे काि करके चली जाती हैं और पूरे टदन काि कराओ तो पैसों का बहुत बड़ा खचाच हो जाता है . गााँव की कािवाली बहुत कि पैसों िें काि कर दे गी.” आटदराज ने थोडा सोचा कफर बोला, “तू रणवीर की लडकी टदशा को क्यों नही ले जाता? वो तेरे घर काि भी करे गी और तुझे एक पैसा भी नही दे ना पड़ेगा. ितलब फ्री की नौकरानी और उस किला के होश टिकान भी लगे रहें गे . ” शोभराज के टदिाग की बत्ती जल उिी. उसे सच िें ये बात बहुत अच्छी लगी लेककन एक िुश्ककल भी