Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 24

24 किला ने आटदराज से कजाच नही मलया था. आटदराज की िजब र ू ी ये थी कक वो ककसी से यह मशकायत भी नही कर सकता था कक दे खो किला ने िुझस कजच नही मलया. लोग उसे पागल बताते . लेककन आटदराज किला से इस बात की द क ु िनी भी िान गया था. सीिा की शादी के बाद किला की िुश्ककल तो कि हो गयीीं थी लेककन पड़ोमसयों का थोडा कजाच हो गया था. अब किला के पास पैसे तो थे ही नही ले ककन इसके मलए किला ने उस पड़ोसी को अपनी खेती को पट्टे पर दे टदया. श्जसका ितलब ये हुआ कक उस साल खेत का पट्टा(भाडा) नही आना था. किला को पैसों की बहुत ककल्लत हो उिी. किला के सबसे छोिे लडके कयाि को तो द ध के दशचन ही नही होते थे . द ध वाले से द ध तो मलया जाता था लेककन वो मसफच दो बार की चाय के लायक होता था. उस द ध की िारा का लीिर भी द ध वाले के पास नही होता था. द ध वाले के पास सबसे छोिा लीिर ढाई सौ एिएल का होता था लेककन किला के घर उस का भी आधा द ध मलया जाता था. यानन करीबन सवा सौ एिएल. ये िारा इतनी थी श्जतनी कोई शराबी शराब एक बार िें बेकार िें पी जाता था. लेककन किला के घर पाींच बच्चों के मलए इतना द ध मलया जाता था. श्जसकी कीित शायद दो या तीन रूपये होती थी. और कभी कभी तो द ध ू धया इस द ध को दे ने के मलए भी िना कर दे ता था. क्योंकक किला पर वपछले िहीन के द ध के पैसे उधार होते थे . द ध लेने किला का बड़ा बेिा जीतू जाता था. द ध ू धया श्जतनी खखच खखच पैसे लेने के बावजूद उसको सवा सौ एिएल द ध दे ने िें करता था उतना ही द ध िुफ्त िें वो जीतू के सािने िोहल्ले के कुत्ते को वपला दे ता था. उतना ही द ध िुफ्त िें वो िश्न्दर िें भोले नाथ के मशवमलींग पर चढ़ा दे ता था. उतना ही द ध वो िुफ्त िें गााँव के बाहर खड़े भूतों वाले पीपल पर चढ़ा दे ता था. लेककन इस गरीब घर को थोडा सा द ध दे ने िें भी सौ तरह की बातें ककया करता था. कहता था नकद पैसा लेकर आया करो. द ध की िारा बढाकर मलया करो. िीं की िें उझक कर ित दे खा करो. क्योंकक तुम्हारे दे खन से द ध की िारा घि जाती है . यही नही द ध ू धया उस सवा सौ एिएल द ध िें भी थोडा सा कि दे ता था. लेककन िोहल्ले के कुत्ते, गााँव के बाहर खड़े भूत वाले पीपल और िश्न्दर के मशवमलींग को द ध चढ़ाने ि कभी कींज स ी नही की. छोिे से धगलास िें जब द ध घर िें आता. किला उसे उबाल कर जब चाय बनाती और वो चाय जब बनकर बच्चो के मलए दी जाती. तब बच्चों िें जिकर बहस होती थी. एक द स रे से रूिा रूिी होती थी. िााँ स