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आटदराज के िुताबबक रणवीर की पहली बीबी से पैदा दूसरी लडकी सीिा की उम्र शादी लायक होने को आ गयी थी. एक टदन आटदराज ने किला के घर आ उसे फिकारते हुए कहा,“ किला तुझे ये भी टदखाई नही देता कक घर िें एक लड़की शादी लायक हो गयी है और तू है कक उसकी शादी के बारे िें जरा भी नही सोचती.
क्या वो लडकी सौतेली है इस मलए ये व्यवहार कर रही है. अगर ऐसा है तो गााँव िें पींचायत बैि जाएगी और अगर रुपयों पैसों की ककल्लत है तो िुझे बता. श्जतने पैसे चाटहए उतने ले ले और इस लड़की की शादी कर दे. जवान लडकी घर िें बैिी रहे ये भी अच्छा नही होता.”
सीिा की उम्र अभी सोलह सरह साल के आसपास भी नही थी लेककन आटदराज किला को बबाचद करने के मलए यह सब करवाना चाहता था. उसे पता था कक किला के पास इस वक्त पैसा नही है और अगर किला इस वक्त सीिा की शादी करती है तो उसे पैसों की जरूरत पड़ेगी.
अगर किला ने कफर से पैसा मलया तो बाकी की जिीन भी आटदराज की हो जानी थी. किला िन ही िन िें आटदराज की बात का बुरा िान गयी थी लेककन बड़े अदब से बोली,“ दद्दा आप िेरी हालत तो देख ही रहे हो. ऊपर से सीिा के लायक कोई लड़का भी अभी िुझे नही पता. कफर एकदि इस तरह शादी कै से हो जाएगी?”
आटदराज अपने टदिाग िें पूरी योजना पहले से तैयार करके आया था. बोला,“ तू लडके की धचींता ित कर. लड़का िैने देख रखा है. बस शादी की तैयारी कर. यहीीं पास के ही गााँव का लड़का है. वो भी सीिा की तरह एक पैर से ववकलाींग है. वो लोग शादी के मलए तैयार भी हैं.
िैं लडके के नाि से आज ही शादी की तारीख पींडडत से ननकलवा देता हूाँ. जो भी तारीख ननकलेगी वो िैं बता दू ींगा. बाकी की शादी की तैयारी सब तुझे ही देखनी होगी और िुझसे श्जस तरह की भी िदद की जरूरत हो वो बता देना. उसके मलए िैं तैयार हूाँ.”
इतना कह आटदराज वहाीं से चला गया. किला घूींघि िें बैिी हुई आकचयच चककत हो उसे देखती रह गयी. वो श्जतना सोच रही थी आटदराज उससे कहीीं आगे ननकला. किला को िजबूरी िें सीिा की शादी करनी ही थी. एक तो वो उसकी सौतेली बेिी थी और सौतेली िााँ को लेकर लोग तरह तरह की बातें करते थे.
किला नही चाहती थी कक उसके बारे िें भी लोग इस तरह की बातें करें लेककन सबसे बड़ी िुश्ककल ये आ खड़ी हुई कक सीिा की शादी के मलए पैसों का इींतजाि कै से हो? चार पाींच बच्चों की परवररश और कफर ऊपर से एक लडकी की शादी.
किाने वाला भी घर िें कोई नही था. जो खेती का पट्टा आता था वो घर खचच के मलए भी नाकाफी होता था. अगर आटदराज से कजाच ले भी ले तो बबाचदी होनी तय थी. किला को कोई रास्त्ता न सूझता था. श्जतना