Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 20

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बाकी लोगों का कजाच अदा कर किला के पास मसफच पाींच हजार रूपये बचे. घर िें राशन की ककल्लत थी. बच्चों को दाल रोिी भी िीक से नही मिल रही थी. किला ने थोड़े से रुपयों से राशन खरीद मलया और थोड़े से रूपये बचा कर रख टदए. क्योंकक एक िहीने बाद ही उसे एक बच्चे को जन्ि देना था.
श्जसे िोहल्ले के जानकार लोग अशुभ भी िन रहे थे. कहते थे कक जब से ये बच्चा पेि िें आया है तब से घर िें परेशाननयों की झड़ी लग गयी है लेककन किला उस बच्चे को अपनी कोख िें रखे हुई थी. उसका टदल नही िानता था कक ऐसा कु छ हो भी सकता है.
एक िहीने बाद किला के बच्चा हुआ. ये लड़का था. नाि रखा गया कयाि. लेककन लोग उसे पट्ट पैर का कहते थे. पट्ट पैर से ितलब अशुभ पैर वाला लड़का. अब किला तीन लडकों और तीन लडककयों का बोझ अपने कन्धों पर मलए हुई थी.
घर िें किाने वाला कोई नही था. खेत घर से दो ककलोिीिर दूर था श्जसे खुद सम्हालना किला के बस की बात नही थी. किला ने बची हुई खेती को पट्टे पर उिा टदया. श्जससे कु छ पैसों का भी जुगाड़ हो गया.
खेती को पट्टे पर उिाने से साल िें मसफच एक बार ही पैसा मिलता था लेककन मिलता तो था बस यही काफी था. अनतररक्त आिदनी के मलए किला ने लोगों के गेंहूाँ और ििर िें से कीं कड़ी और खराब दाना बीनने का काि शुरू कर टदया.
लोग किला के घर आ सािान दे जाते और किला उसको छान फिक कर उन्हें बापस दे देती. इस बात के मलए किला को गेंहूाँ या ििर को बीनने का एक रूपये ककलों िजदूरी भत्ता मिलता था. टदन िें पाींच से दस ककलों अनाज साफ हो ही जाता था. श्जससे किला के घर का शाक सब्जी का खचाच चलने लगा.
किला के इस तरह िेहनत करने की चचाच पूरे गााँव िें फै ल रही थी. लोग किला की तारीफें करते न थकते थे. ककसी ने किला की जुबान से ककसी दूसरे के मलए कभी भी कडवे शब्द न सुने थे. किला का आींगन और लोगों से काफी बड़ा था. िोहल्ले की औरतें सटदचयों के टदनों िें किला के आींगन िें आ बैि जाती. किला का िीिा स्त्वभाव देख िोहल्ले के लोग किला की िदद भी करते थे.
शोभराज और आटदराज का पेि अभी भरा नही था. किला के िेहनत करने की चचाच उन लोगों के कानों िें पहुींची तो नतलमिला कर रह गये. ये लोग नही चाहते थे कक किला ककसी भी तरह आबाद हो जाए. उनका िन तो किला को बबाचद कर उसकी बाकी की जिीन हडपना था.
इन दोनों भाइयों ने रणवीर की िौत का भी खूब िखौल बनाना शुरू कर टदया था. जहााँ भी बैिते वहाीं यही कहते कक रणवीर की िौत अधधक अिरूद खाने से हुई है. लोग उनकी बातों पर यकीन भी कर लेते थे क्योंकक ये दोनों भाई रणवीर की िौत के सिय उसको किला के साथ टदल्ली के अस्त्पताल लेकर गए थे.