Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 18

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कक किला इन बातों को कभी नही जान पायेगी. रणवीर की िौत के बाद किला का एक भाई उसके पास कु छ टदनों के मलए िहर गया था. श्जसे घर के काि से लेकर खेती तक का काि देखना था.
रणवीर के बीिार होने से लेकर िरने तक किला पर कई लोगों का कजाच हो चुका था लेककन किला के घर िें एक फू िी कोडी भी ऐसी नही थी श्जसे वो ककसी को देकर उसका कजाच चुका सके. टदन गुजरने के साथ कजचदारों के तकादे भी बढ़ते जा रहे थे. किला को कजाच ननकालने का कोई रास्त्ता न टदखा तो उसने जिीन बेचने की सोच डाली. उसी टदन किला ने आटदराज को अपनी जिीन बेचने की खबर मभजवा दी.
श्जस खबर का इन्तजार आटदराज और शोभराज को पल पल रहता था वो आज खुद किला की तरफ से सुनने को मिल गयी थी. आटदराज के कदि तो जिीन पर नही पड़ते थे लेककन किला के घर पहुींच झूिे टदखावे से बोला,“ किला तुि िेरे पैसों की वजह से जिीन ित बेचना. तुि िेरे पैसे जब चाहो तब देना देना. िुझे कोई जल्दी नही.”
किला िें आटदराज की इस बात से कोई भाव नही जागा. बोली,“ दद्दा आपके साथ साथ और लोगों के भी पैसे िुझपर बाकी हैं. इसमलए िेरे मलए अभी यही करना िीक रहेगा. आप िेरी जिीन खरीद लीश्जये. नही तो ककसी और को ववकबा दीश्जये.”
आटदराज ने जल्दी से कहा,“ देखो किला अगर तुिने जिीन बेचने का फै सला कर ही मलया है तो िैं तुिसे िना भी नही कर सकता लेककन अपने खानदान की जिीन अपने खानदान िें ही रहे इससे अच्छी कोई बात नही हो सकती. तुम्हारी जिीन का िूल्य जो बाहर का आदिी देगा वही िें देने को तैयार हूाँ.” किला ने जिीन के बारे िें ककसी से कोई बात नही की थी. बोली,“ दद्दा िैं ये सब क्या जानूाँ? आप अपने टहसाब से देख लीश्जये. आप कु छ बुरा थोड़े ही करेंगे िेरे साथ.”
आटदराज का टदल किला की इस बात से कााँप गया था. सािने एक ववधवा औरत बैिी हुई उस पर इतना भरोसा कर रही थी और वो था कक चाल पर चाल खेले जा रहा था. जबकक किला के पनत का आधा हत्यारा भी वो खुद था.
लेककन दुष्ि अपनी दुष्िता इतनी आसानी से नही छोड़ता. आटदराज ने अपना टदल कडा ककया और टदखावे से बोला,“ िीक है बहू. िैं तुम्हें जायज कीित ही दे दू ींगा लेककन ये जिीन तुझे कब बेचनी है?”
किला ववना रुके बोली,“ िैं तो तैयार हूाँ. बस अब जो भी देरी है वो आपकी तरफ से होगी. आप चाहें तो कल ही िें जिीन मलखने को तैयार हूाँ.” आटदराज भी इस काि िें देर नही चाहता था. बोला,“ िीक है बहू. तू कल तहसील चलने के मलए तैयार रहना. िैं कल ही तुझे पूरा पैसा दे दू ींगा और जिीन भी कल ही मलख जाएगी. आज कल जिीन की कीित तुम्हारे खेत के पास आि हजार रूपये बीघे की है तो िैं तुम्हें यही कीित दे सकू ीं गा लेककन तुम्हें ककतनी जिीन बेचनी है?”