10
घर आकर उन्होंने अपने वपता को खबर भेजी तो उधर से उनका जबाब आया कक उनके पास भी इतने पैसे नही कक वो किला को दे सकें.
किला के भाई ने अपने बहनोई के मलए अपना खून तक टदया लेककन आधथचक तींगी की वजह से पैसा न दे सके. किला को चारो ओर ननराशा नजर आती थी. पनत की गम्भीर बीिारी और पाींच बच्चों का बोझ. ऊपर से एक बच्चा उसके गभच िें भी था.
किला ने पनत के िना करने के बावजूद शोभराज और आटदराज से िदद िाींगने की सोच ली. कोई भी औरत अपने पनत को पैसों की तींगी के चलते भी िरने के मलए तो नही छोड़ सकती. कफर चाहे उसके गहने बबक जाएाँ या उसकी जिीन बबक जाए.
किला जानती थी कक अगर कजाच ज्यादा हो गया तो जिीन बबक जाएगी और उसके बच्चे जीवन भर मभखाररयों की तरह जीयेंगे. लेककन पनत की श्जन्दगी ही न रही तो जिीन और बच्चों का ही क्या होगा? श्जस पनत की वजह से उसे जिीन मिली. श्जस पनत की वजह से उसे बच्चे मिले. आज उसी को िरने के मलए छोड़ दे. कि से कि किला तो यह न सोच सकती थी.
किला ने अपना एक बच्चा भेज आटदराज को बुलवा मलया. आटदराज को पता था कक उसे किला ने क्यों बुलवाया है? बच्चे के साथ भागता ही चला आया. आटदराज ररकते िें किला का जेि लगता था और एक ररकते िें फू फा.
लेककन किला आटदराज से यहीीं का ररकता िान घूाँघि करती थी. आटदराज रणवीर के घर आ बैिक िें बैि गया. किला किरे के दरवाजे के पीछे आ खड़ी हो गयी. क्योंकक औरतों को अपने से बड़े के सािने आने की इजाजत नही थी. बात करना तो दूर की बात थी.
आटदराज ने किला से पूींछा,“ बता बहू िुझे क्यों बुलवाया? ककसी चीज की जरूरत हो तो बेखझझक हो कह देना.” किला को आटदराज की बात अपनेपन जैसी लगी. बोली,“ दद्दा तुम्हारे भाई के इलाज िें कु छ पैसों की जरूरत पड रही है. अगर...?”
इतना कह किला चुप हो गयी. आटदराज तो इस बात का कब से इन्तजार कर रहा था. बोला,“ बहू पैसों की जरूरत थी तो बच्चे से िींगवा मलए होते. इसिें पूींछने की क्या बात थी? बता ककतने रूपये चाटहए? आज ही रूपये टदए देता हूाँ.”
किला को लगा कक आटदराज को रणवीर पर तरस आ गया है इसमलए इतना भावुक हो बात कर रहे हैं. लेककन वो क्या जानती थी कक इसिें आटदराज की चाल कू ि कू ि कर भरी हुई है. बोली,“ दद्दा िैं रुपया लेकर क्या करुाँ गी? आप इनको टदल्ली लेकर चले चमलए. वहाीं जो भी खचाच हो कर दीश्जयेगा. बस. िुझे कु छ नही चाटहए.” किला ने सच्चे टदल से आटदराज पर भरोसा टदखाया था. उसे लगा जैसे आटदराज उसका