May 2026_DA | Página 7

समान अधिकार प्रापत हो । डा. आंबेडकर का कहना था कि भाईचारे के बिना, सितंत्रता और समानता सहज एवं सपष्ट रूप से नहीं प्रापत किया जा सकता है ।
वासति में डा. आंबेडकर और डा. मुखजटी के राष्ट्रवादी विचारधारा में एक अद्भुत सामय देखा जा सकता है । दोनों जननेताओं के सिप्न एक थे । एक तरफ डा. मुखजटी भारत राष्ट्र की भलौगोलिक एकता के लिए प्रतिबद्ध रहे, तो वहीं डा. आंबेडकर भारत में सामाजिक एकता और सबके सिाहभमान के पक्षधर के रूप में विभिन्न मोचदे पर सहरिय रहे । डा. आंबेडकर और डा. मुखजटी दोनों ही जवाहरलाल नेहरू के नेतृति बनी पहली राष्ट्रीय सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल थे, लेकिन दोनों ही अंततः नेहरू सरकार से दूर होकर अपने-अपने ढंग से राष्ट्र सेवा एवं कलयाण में लग गए ।
डा. आंबेडकर के बलौहद्धक समबनध सिर्फ
डा. मुखजटी से ही नहीं थे, बशलक डा. आंबेडकर के राष्ट्रीय सियंसेवक संघ के संसथापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार, माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर, विनायक दामोदर सावरकर, डा. बालककृष्ण शिवराम मुंजे जैसे प्रखयात राष्ट्रवादी नेताओं से भी काफी प्रगाढ़ समबनध रहे और इन नेताओं के साथ डा. आंबेडकर भेंट करके प्रायः राष्ट्र एवं समाज से जुड़े महतिपूर्ण विषयों पर चर्चा करते रहते थे । डा. आंबेडकर सभी राष्ट्रवादी नेताओं को प्रेरित करते हुए कहते थे कि सामाजिक संतुलन एवं विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों की सुरक्षा एवं सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विकास के लिए सामाजिक समभाव एवं समानता पूर्ण वयििार लाने के लिए एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन की आि्यकता है । डा. आंबेडकर ने संघ के नेताओं को इस बात के लिए भी प्रेरित किया
कि संघ को राजनीतिक क्षेत्र में भी अपना प्रतिनिधिति करना चाहिए ।
सितंत्रता के दशकों बाद केंद्र में 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृति में केंद्र सरकार का गठन होने के बाद 2019 में जब जममू एवं क्मीर से धारा-370 हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, तो डा. मुखजटी का सिप्न पूरा हुआ और जममू एवं क्मीर देश का पूर्ण रूप से अभिन्न अंग बन गया । अब एक बार पश्चम बंगाल में ममता सरकार के पतन के बाद पुनः कहीं न कहीं दोनों नेताओं की आतमाएं इसलिए प्रसन्न होगी, कयोंकि पश्चम बंगाल में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने हिनदू विरोधी सरकार को पराजित करने में सफलता प्रापत की है । देखना यह होगा कि देश में समानता, बंधुति एवं सामाजिक एकता से जुड़ा डा. आंबेडकर का सिप्न कब पूर्ण होगा..? �
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