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पश्चिम बंगाल में ध्वस्त हो गई दलित विरोधी ममता सरकार
डा. विजय सोनकर शा्त्ी
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श्चम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही भारतीय जनता पाटटी( भाजपा) का वह सपना पूरा हो
गया, जो सपना कई दशक पहले शिक्षाविद्,
चिनतक और भारतीय जनसंघ के संसथापक डा. ्यामा प्रसाद मुखजटी ने देखा था । हिनदू धर्म, हिनदू संस्कृति एवं हिनदू सभयता से परिपूर्ण पश्चम बंगाल की विरासत को सितंत्रता के बाद से जो ग्िण लगा, वह 2026 में हुए विधानसभा
चुनाव के आए परिणामों के बाद छटने लगा है । मुशसलम तुष्टिकरण के बीच ममता सरकार िषषों से निरंतर यह दावा तो करती रही, राजय में प्रतयेक नागरिक को समान दृष्टि से ही देखा जाता है, लेकिन वासतहिक शसथहतयां अनेकानेक दावों के विपरीत ही सिद्ध हुई । मुशसलम तुष्टिकरण की पराकाष््ा के दुखद एवं घातक परिणाम राजय के हिनदू समाज को भुगतने पड़े, जिसके कारण दलित एवं आदिवासी वर्ग की शसथहत विशेषतः अतयंत दयनीय रही ।
वैसे राजय में यह सिलसिला सितंत्रता के बाद से आरमभ हो गया था । कांग्ेस और वामपंथियों के शासनकाल में दलित एवं आदिवासी वर्ग की जनता पीड़ित थी और ऐसा ही ममता के कार्यकाल में भी हुआ । राजय की बदतर शसथहतयों का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि सितंत्रता के उपरांत अब तक पश्चम बंगाल में दलितों के लिए अलग से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कलयाण के लिए अलग से कोई विभाग ही नहीं बनाया गया । मुझे आज भी समरण है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल में मैंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के चेयरमैन के रूप में पश्चम बंगाल सरकार को कई हनददेश दिए, लेकिन उन हनददेशों पर कोई धयान नहीं दिया गया । अंततोगतिा 2002 में मुझे बंगाल की वामपंथी सरकार को एक आपराधिक( हरिमिनल) सरकार कह कर संबोधित करना पड़ा था । राजय में दलित एवं आदिवासी वर्ग के साथ ऐसा किया जाना पूि्यितटी कांग्ेस, कमयुहनसट या ममता सरकार का आपराधिक ककृतय एवं संवेदनहीनता की पराकाष््ा ही कहा जाएगा ।
समय परिवर्तन के साथ अब पश्चम बंगाल में बदलाव हो चुका है । महातमा गांधी एवं कांग्ेस की नीतियों का विरोध करने वाले डा. ्यामा प्रसाद मुखजटी की जनमभूमि में भाजपा को मिली विजय के साथ ही डा. भीम राव आंबेडकर का वह सिप्न भी पूरा हो सकेगा, जिस सिप्न में वह भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखते थे, जहां कोई भेदभाव न हो और प्रतयेक वयशकत को
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