May 2026_DA | страница 15

दिया था । इससे पहले दिलली, हरियाणा महाराष्ट्र, मधय प्रदेश विधानसभा चुनाव के दलौरान भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं की शशकत को सभी ने देखा । ऐसे में यह कहना अनुचित नहीं होगा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला शशकत को नीति निर्धारण की प्रहरिया में भागीदारी से अब और वंचित नहीं रखा जा सकता है ।
आगे बढ़ रही हैं अनुसूचित जाति-जनजाति की महिलाएं
केंद्र में 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृति में सरकार का गठन होने के बाद से देश के विकास में आई नई गति एवं प्रगति को देश ही नहीं, बशलक विदेश में रहने वाले भी देख रहे हैं । वासतहिक एवं जमीनी सतर पर चल रही विकास की प्रहरिया का लाभ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को भी मिला है । शिक्षा, कलौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के कदम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं । सरकारी प्रयासों और आतम- वि्िास के दम पर यह महिलाएं अब केवल
केंद्र में 2014 में प्धानमंत्ी मोदी के नेतृतव में सरकार का गठन होने के बाद से देश के विकास में आई नई गति एवं प्गति को देश ही नहीं, बसलक विदेश में रहने वाले भी देख रहे हैं । वा्तलवक एवं जमीनी ्तर पर चल रही विकास की प्लरिया का लाभ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को भी मिला है ।
पारंपरिक वयिसायों तक सीमित न रहकर तकनीकी और उद्यमशीलता में भी नई मिसाल कायम कर रही हैं ।
शिक्षा में हुई अभूतपूर्व वृद्धि से अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिला साक्षरता और उच्च शिक्षा में नामांकन में उललेखनीय सुधार हुआ है । 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, उच्च शिक्षा में कुल नामांकन में महिलाओं की हिससेदारी 43 प्रतिशत है, जिसमें अनुसूचित
जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की छात्राएं भी शामिल हैं, जो विज्ान और तकनीकी क्षेत्रों में उनकी बढ़ती रुचि को दर्शाता है । नवाचार और अनुसंधान में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं की बढ़ती संखया के साथ ही 31 जनवरी 2026 तक भारत में दो लाख से अधिक मानयता प्रापत सटाट्टअपस में से एक लाख से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है, जिनमें से कई
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं । ऐसे में राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से राष्ट्र सेवा के लिए कार्य करने वाली अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के सपने की अनदेखी अब किसी भी शसथहत में नहीं की जा सकती है । यही कारण है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून के माधयम से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को सत्ा में प्रतयक्ष भागीदारी देने के लिए लगातार प्रयास करती आ रही है ।
प्ाथमिकता से होना चाहिए महिला सशक्तकरण
सामानय रूप से महिला सशशकतकरण का तातपय्य उन बाधाओं का सामना करने और उनिें दूर करने की रणनीति से है, जिससे एक महिला अपने परिवेश और अपने जीवन को प्रभावित
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