के लिए प्रसताहित परिसीमन में लोकसभा सीटों की संखया 543 से बढ़ाकर 800 से अधिक( 850 तक) करने का प्रसताि है, जिससे महिलाओं को आरक्षण आसानी से दिया जा सकेगा । सीटें 850 तक बढ़ाने का प्रसताि समान अनुपात में विसतार पर आधारित है यानी सभी राजयों में लगभग 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जातीं, जिससे राजयों का आपसी संतुलन बना रहता । 543 सीटों पर यह लागू करने से संखया करीब 815 बनती है, इसलिए अधिकतम सीमा 850 तय की गई ।
केंद्र सरकार के अनुसार परिसीमन आयोग के कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है । आयोग की सिफारिशें संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही लागू होंगी । 2029 तक होने वाले सभी चुनाव मलौजूदा वयिसथा के अनुसार ही होंगे, इसलिए तमिलनाडु या पश्चम बंगाल जैसे राजयों के चुनाव पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगी । सभी राजयों की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी, इसलिए किसी राजय का प्रतिनिधिति कम
नहीं होगा ।
लेकिन विपक्ष की हठधर्मिता एवं डर इस पूरी प्रहरिया में सपष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो महिला सशकतीकरण की दिशा में बड़ा बाधक बन चुका है । विधायिका में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण अब कब और कैसे लागू होगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए विपक्ष का यह कदम किसी झटके से कम नहीं है ।
विपषि की नकारातमक भूमिका
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की सशकत महिलाओं के बड़ी संखया में होने वाले जन प्रतिनिधिति के सपने को चकनाचूर करने वाले विपक्ष की नकारातमक भूमिका को उजागर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी ने अपनी टिपपणी में कहा कि इस विधेयक की विफलता महिलाओं के आतमसममान पर एक सीधा आघात है, ऐसा
अपमान, जिसे महिला मतदाता कभी नहीं भूलेंगी । महिलाएं सब कुछ भूल सकती हैं, लेकिन वह अपने सिाहभमान पर हुए अपमान को कभी नहीं भूलतीं । प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार यह संशोधन भारत की विकास यात्रा में महिलाओं को समान सहभागी बनाने का एक ईमानदार प्रयास था । देश अब महिलाओं के अधिकारों को छीनने के लिए अपनाए जाने वाले इस नकारातमक राजनीतिक तरीकों को पूरी तरह समझ चुका है ।
इसी तरह गृहमंत्री अमित शाह ने महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने के बाद विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए इसे ' नारी शशकत का अपमान ' और ' वि्िासघात ' बताया । उनिोंने कहा कि विपक्ष ने ' अगर-मगर ' के बहाने 70 करोड़ महिलाओं के अधिकार को छीना है और वह 2029 सहित हर चुनाव में ' महिलाओं के आरिोश ' का सामना करेंगे । उनिोंने बताया कि विपक्ष ने सार्वजनिक रूप से बिल का समर्थन किया, लेकिन वोटिंग के दलौरान ' अगर-मगर,
ebZ 2026 13