May 2026_DA | Page 12

कवर स्टोरी

में महिला आरक्षण विधेयक को एक महतिपूर्ण एवं बड़े कदम के रूप में देखा जा सकता है । महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ' नारी शशकत वंदन अधिनियम '( 106वां संवैधानिक संशोधन) के रूप में भी जाना जाता है, संसद और राजय विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई( 33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित करने समबनधी कानून है । सितंबर 2023 में यह कानून महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और लैंगिक समानता सुनिश्चत करने के उद्े्य से पारित किया गया । विधेयक का उद्े्य लोकसभा और राजय विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना है । आरमभ में महिलाओं के लिए यह आरक्षण पंद्रह वर्ष के लिए लागू किया जाएगा, जिसे आि्यकतानुसार संसद बढ़ा सकती है । विधायिका में महिलाओं की अधिक हिससेदारी के लिए संसद की 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करते हुए 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का रासता निकाला गया है, जिसमें विपक्ष अपनी नकारातमक भूमिका के
साथ फिर राष्ट्रविरोधी राजनीति करने के लिए सामने आ चुका है । यदि नारी शशकत वंदन अधिनियम पारित हो जाता तो पूरे संसद में कम से कम 274 महिला सांसद होती, जिनमें से 74 दलित महिला सांसदों की संखया होती ।
महिला आरषिण विधेयक और परिसीमन
महिला आरक्षण विधेयक को देश में परिसीमन प्रहरिया के बाद लागू किया जाना है । इसीलिए केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून और परिसीमन समबनधी 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में प्रसतुत किया । लेकिन विपक्ष दलों की सिाथ्य एवं हितों पर केंद्रित राजनीति के कारण उकत विधेयक संसद में पारित नहीं सका । इसका सबसे जयादा प्रभावित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं पर पड़ा है कयोंकि विधेयक में महिलाओं के आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित करने की वयिसथा की गई है । आरक्षण की यह नई वयिसथा परिसीमन की आगामी प्रहरिया पूरी होने पर ही लागू होगी कयोंकि परिसीमन आयोग सीटों की संखया और सीमा निर्धारित करेगा, जिसमें 2026 के बाद की जनगणना को आधार माना जा सकता है ।
परिसीमन की प्रहरिया में देश के निर्वाचन क्षेत्रों( लोकसभा / विधानसभा) की सीमाओं को जनसंखया के अनुसार पुनः निर्धारित किया जाना है और यह प्रहरिया प्रतयेक जनगणना के बाद होती है । केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन से इसलिए जोड़ा कयोंकि महिलाओं को आरक्षण देने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करना अर्थात परिसीमन का होना आि्यक है । चूंकि 1976 में लोकसभा सीटों की अधिकतम सीमा 550 निर्धारित की गई थी और उस समय देश की जनसंखया 54 करोड़ थी । अब जनसंखया लगभग 140 करोड़ हो गई है, इसलिए प्रतिनिधिति संतुलित करने
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