विधेयक पारित न होने से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की उन महिलाओं के सपने भी विपक्ष की कुशतसत राजनीति के भेंट चढ़ गए, जो महिलाएं शिक्षित होकर बलौहद्धकता के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए नई उममीद लेकर सामने आई हैं ।
वर्तमान समय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदसयों के लिए लोकसभा में कुल 131 सीटें आरक्षित हैं, जो कुल 543 सीटों का लगभग 24 प्रतिशत है । इनमें से 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए हैं । विपक्ष अगर महिला आरक्षण विधेयक में अड़ंगा न लगाता तो अगली लोकसभा में बढ़ने वाली नई लगभग 44 सीट पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को नए अवसर प्रापत होता और वह भी कानून बनाने की प्रहरिया
में अपनी भूमिका का निर्वहन करने में सक्षम होती और यही अनुपात 800 सदसयों वाली लोकसभा में आरक्षित सीट पर दलित महिलाओं की संखया लगभग 75 होती । महिला आरक्षण संबंधी संशोधन विधेयक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए सत्ा की भागीदारी की राह भी प्रशसत करने के एक बड़ा माधयम भी बनता । लेकिन कांग्ेस, समाजवादी पाटटी, तृणमूल कांग्ेस, डीएमके जैसे विपक्षी दलों के सिाथ्य एवं छदम जनसेवा वाली राजनीति ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के सपने को फिलहाल नष्ट कर दिया ।
्या है महिला आरषिण विधेयक
भारत में राजनीतिक सशशकतकरण की दिशा
ebZ 2026 11