March 2026_DA | Seite 10

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शैमक्क उतरान के लिए आंदोलन मक्या । मतुआ महासंघ की ्रापना हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर ने की, मज्होंने मतुआ पंथ के माध्यम से नामशूद्रों और अन्य दलितों को एकजुट मक्या । नमशुद्र और मतुआ समाज मुख्य रूप से दमक्ण बंगाल में सबसे अधिक जनसंख्या वाला प्रभावशाली समाज है । उत्र बंगाल के राजबंशी भी मुख्य पिछडा समाज का प्रतिनिधिति करते हैं और उनकी स्रमत भी ठीक नहीं है । हालांकि बंगाल के अन्य पिछडा िगयों के लिए कोई जनगणना आंकडा उपलबध नहीं है । राज्य में मतुआ समुदा्य का दमक्ण बंगाल के लगभग 60 विधानसभा सीटों पर िचथा्ि है । मुस्लमों के बढ़ते उतपीडन और उस उतपीडन के विरुद्ध ममता की चुपपी के कारण मतुआ, नाममुद्रों सहित अन्य दलित और आदिवासी जामत्यां एकजुट हो रही
हैं और इसका परिणाम चुनाव में ्पषट रूप से दिखाई देगा ।
राज्य के दलित और वंचित समाज की लगातार अनदेखी से पैदा हो रहा क्रोध सडकों पर दिखने लगा है, लेकिन मुख्यमंत्ी ममता पर इसका कोई असर फिलहाल दिखाई नहीं देता हैI तृणमूल कांग्रेस से जुड़े समाज विरोधी ततिों एवं पाटजी द्ारा पोषित गुंडों के बल पर ममता बनजजी अपनी सत्ा को बचाने की कोशिश में जुटी हुई हैं । राज्य में भाजपा की ्िीका्यथाता लगातार बढ़ रही है । वामदलों के साथ ही कांग्रेस को पीछे छोडकर भाजपा का मुख्य विपक्ी दल के रूप में उभारना ्यह इंगित करता है कि राज्य में भाजपा के प्रति आम जनता को वि्िास बढ़ रहा है । इसका पूरा श्रेय भाजपा नेता और प्रधानमंत्ी नरेंद्र मोदी और उनकी जनकल्याणकारी नीमत्यों को मद्या जा
सकता है । मोदी सरकार की मक्र्याप्रमक्र्या और जनकल्याणकारी नीमत्यों से घबराकर ममता सरकार ने अनेकों जनकल्याणकारी ्योजनाओं को राज्य में लागू नहीं मक्या, जिनका लाभ वर्तमान में देश के अन्य राज्यों की गरीब, दलित और आदिवासी जनता को मिल रहा है । ्यह सभी वह ्योजनाएं हैं, मज्हें गरीबों, दलितों, आदिवामस्यों और पिछडे समुदा्यों के हितों के दृशषटगत लागू मक्या ग्या है । बंगाल में बेहद गरीबी में जी रहे लाखों हिंदू परिवारों को ममता सरकार की नीमत्यों के कारण कई सरकारी ्योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है । आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा का लक््य पूर्ण बहुमत के लिए लगभग 200 सीटें हासिल करने का है और पाटजी इसी दिशा में लगातार अपना काम करते हुए समक्र्य है ।
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