असम में फिर भाजपा सरकार
जिन पांच राज्यों में चुनावी प्रमक्र्या प्रारमभ हुई है, उनमें से सिर्फ असम एकमात् ऐसा राज्य है, जहां भाजपा सत्ा में है । ्यहां भी भाजपा अपनी दम पर सत्ा हासिल करने की लडाई लड रही है । राज्य की जनता, विशेष रूप से गरीब, दलित, वनवासी और वंचित वर्ग की जनता अपने भविष्य के हितों को ध्यान में रखकर भाजपा के साथ खडी हुई नजर आती है । राज्य में 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार सरकार का गठन मक्या था । पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले राजग गठबंधन को 86 सीटें मिली थीं । राज्य में सरकार बनाने में आम जनता, विशेष रूप से दलित जनता का विशेष ्योगदान रहा । भाजपा ने सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखकर जिस तरह से सत्ा का संचालन मक्या, उसके सुखद परिणाम गरीब, दलित, वनवासी एवं वंचित जनता के सामने आए और उनकी स्थितियों में आमूलचूल परिवर्तन हुआ । 2001 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल जनसंख्या का 6.9 प्रतिशत अनुसूचित
वर्ग से संबंधित है । राज्य की सोलह उपजाति अनुसूचित जाति की श्ेणी में शामिल हैं । इनमें कैबाट्ट( जमल्या), बमन्या, धोबी( धूपी), हीरा, झालो( झालो मालो), दुगला( डोली), बांसफोर, भुईमाली( माली), जलकोट, मुंची, पाटनी, नामसुद्र, लालबेगी, महरा, मेहतर( भंगी) और सूत्धार शामिल हैं ।
असम में भाजपा सरकार बनने के बाद केंद्र एवं राज्य सरकार ने जिस तरह से असम सहित उत्र-पूर्व के समग्र एवं मन्योजित सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए कदम उठाए, उसका परिणाम ्यह है कि उत्र-पूर्व के सभी राज्यों में भाजपा की स्रमत मजबूत हुई और उत्र-पूर्व राषट्र के विकास की नई कहानी लिख रहा है । सामाजिक और आर्थिक रूप से दलित-आदिवासी वर्ग के हालात में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है, जिससे उत्र-पूिजी राज्यों में शांति ्रामपत करने के कदम सफल हुए हैं । सुरक्ा स्थितियों में हुए बदलाव के साथ मुस्लम एवं चर्च की दलित विरोधी गतिविमध्यों पर अंकुश लगना प्रारमभ हुआ । समाज के अंतिम व्यशकत को लक््य बनाकर मोदी सरकार द्ारा प्रारमभ की गई विकास
्योजनाओं और भाजपा की राषट्र समर्पित सकारातमक राजनीति के कारण पाटजी असम में एक मजबूत स्रमत में है । राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद केंद्र एवं राज्य सरकार ने जिस तरह से असम सहित उत्र-पूर्व के समग्र एवं मन्योजित सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कदम उठाए, उसका परिणाम ्यह है कि उत्र-पूर्व के सभी राज्यों में भाजपा की स्रमत मजबूत हुई और उत्र-पूर्व राषट्र के विकास की नई कहानी लिख रहा है । सामाजिक और आर्थिक रूप से दलित- आदिवासी वर्ग के हालात में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है, जिससे उत्र-पूिजी राज्यों में शांति ्रामपत करने के कदम सफल हुए हैं । समाज के अंतिम व्यशकत को लक््य बनाकर मोदी सरकार द्ारा प्रारमभ की गई विकास ्योजनाओं और भाजपा की राषट्र समर्पित सकारातमक राजनीति के कारण पाटजी असम में एक मजबूत स्रमत में पहुंच चुकी है । ऐसे में राज्य में पुनः भाजपा सरकार का बनना त्य है ।
तमिलनाडु में परिवर्तन की उम्मीद
तमिलनाडु में दलित वर्ग की जनसंख्या लगभग 21 प्रतिशत है । जाती्य हिंसा के लिए राज्य कुख्यात हो चुका है । कथित द्रविड राजनीति ने दलित वर्ग के हितों को बुरी तरह प्रभावित मक्या है । राज्य में अन्य पिछडा वर्ग और दलितों के बीच पैदा हुई गहरी खाई भी इसी द्रविड राजनीति का नकारातमक परिणाम है । चर्च से जुडी शक्तियां िषयों से राज्य में मह्दू हितों को प्रभावित करने में जुटी हुई हैं और अब इसमें मुस्लम शक्तियां भी सशमममलत हो चुकी हैं । इन सबके बीच भाजपा अपना जनाधार खडा करने के लिए प्र्यास कर रही है । 2014 में केंद्र में मोदी सरकार का गठन होने के बाद तमिलनाडु में भाजपा का जनाधार बढ़ा है । मोदी सरकार की विकासवादी राजनीति और का्यथाक्रमों ने जनता के बीच भाजपा को बढ़त बनाने में सफलता मिली है और ्यह 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले कुल प्रतिशत में 2019 एवं 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले मत प्रतिशत में ्पषट रूप से देखा जा सकता है । डीएमके और एआईडीएमके के बीच
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